रांची। झारखंड की ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में राज्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में आयोजित इस सम्मेलन में उन्होंने मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, न्यूनतम मजदूरी और ग्रामीण उद्योगों को बढ़ावा देने सहित कई अहम सुझाव दिए।
मनरेगा में 125 दिनों के रोजगार की मांग
मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत वर्तमान 100 दिनों के बजाय 125 दिनों का रोजगार सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इसके लिए केंद्र सरकार से पर्याप्त बजट उपलब्ध कराने की मांग भी की गई।
उन्होंने कहा कि झारखंड के विकास और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक मजबूती के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना जरूरी है।
महात्मा गांधी के नाम से नई योजना शुरू करने का सुझाव
सम्मेलन में मंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी के नाम से नई जनहित योजना शुरू की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं से महात्मा गांधी का नाम हटाया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है और उनके विचारों तथा ग्रामीण विकास की अवधारणा को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
आवास योजना की राशि बढ़ाने की मांग
दीपिका पांडेय सिंह ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि बढ़ाकर दो लाख रुपये करने का सुझाव दिया। उन्होंने मजबूत फैब्रिकेटेड स्ट्रक्चर वाले आवासों के निर्माण पर भी जोर दिया।
इसके अलावा उन्होंने झारखंड सरकार की अबुआ आवास योजना के तहत लाभार्थियों को 90 दिनों की मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित करने की मांग रखी।
मनरेगा की 900 करोड़ रुपये की बकाया राशि जारी करने की मांग
मंत्री ने सम्मेलन में बताया कि मनरेगा मद में झारखंड का करीब 900 करोड़ रुपये बकाया है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस राशि का शीघ्र भुगतान करने का आग्रह किया, ताकि राज्य में विकास कार्यों और मजदूरी भुगतान में तेजी लाई जा सके।
न्यूनतम मजदूरी बढ़ाकर 433 रुपये प्रतिदिन करने का सुझाव
दीपिका पांडेय सिंह ने ग्रामीण श्रमिकों के हित में न्यूनतम मजदूरी दर बढ़ाकर 433 रुपये प्रतिदिन करने की मांग भी रखी। उनका कहना था कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए मजदूरी दर में संशोधन आवश्यक है।
स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को मिले बेहतर बाजार
मंत्री ने कहा कि झारखंड में 32 लाख से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका गतिविधियों से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने इन महिलाओं के उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और ग्रामीण उद्योगों की स्थापना पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण उद्योगों को बढ़ावा देकर महिलाओं को आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त बनाया जा सकता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।






