गगन में लहराया भारत का परचम: स्काईरूट के विक्रम-1 की ऐतिहासिक लॉन्चिंग, प्राइवेट स्पेस युग की शुरुआत

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नई दिल्ली, 18 जुलाई। भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए शनिवार का दिन ऐतिहासिक बन गया। देश की पहली निजी स्पेस कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने अपने ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट ‘विक्रम-1’ का सफल परीक्षण पूरा कर लिया। यह रॉकेट सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के प्रथम लॉन्च पैड से दोपहर 12:08 बजे सफलतापूर्वक लॉन्च हुआ।

इस उपलब्धि के साथ भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जहां निजी कंपनियों ने ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च किया है। इससे पहले यह उपलब्धि केवल अमेरिका और चीन हासिल कर सके थे।

‘मिशन आगमन’ से शुरू हुआ निजी अंतरिक्ष युग

स्काईरूट एयरोस्पेस के इस ऐतिहासिक मिशन को ‘मिशन आगमन’ नाम दिया गया है। यह कंपनी की पहली ऑर्बिटल टेस्ट फ्लाइट है, जिसका उद्देश्य विक्रम-1 रॉकेट को 450 किलोमीटर की लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित करना है।

इस मिशन के जरिए भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की तकनीकी क्षमता और भविष्य की व्यावसायिक संभावनाओं का परीक्षण किया गया।

रॉकेट के साथ भेजे गए कई महत्वपूर्ण पेलोड

विक्रम-1 अपने साथ कई तकनीकी और प्रयोगात्मक पेलोड लेकर अंतरिक्ष में गया है। इनमें शामिल हैं:

  • ग्रेहा स्पेस, कॉस्मोसर्व, डीक्यूब्ड और स्काईरूट के अपने स्कोप सैटेलाइट।
  • बेंगलुरु स्थित कॉस्मोस डायमंड्स द्वारा तैयार लैब-ग्रोन डायमंड आर्ट पीस ‘कॉस्मिक ब्लूम’।
  • एक माइक्रो-आर्ट पीस।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लिखा गया हस्तलिखित पोस्टकार्ड।

रॉकेट की पूरी उड़ान प्रक्रिया लिफ्ट-ऑफ से लेकर सैटेलाइट को ऑर्बिट में स्थापित करने तक कुल 14 चरणों में पूरी की गई।

प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई

लॉन्च से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम को बधाई दी। उन्होंने इस मिशन को भारत की अंतरिक्ष यात्रा का नया अध्याय बताया और कहा कि यह देश के युवाओं की प्रतिभा, मेहनत और उद्यमशीलता का प्रतीक है।

प्रधानमंत्री ने लोगों से इस ऐतिहासिक मिशन से जुड़ने और टीम का उत्साह बढ़ाने की अपील भी की।

कैसा है ‘विक्रम-1’ रॉकेट?

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया यह रॉकेट आधुनिक तकनीक से लैस है। इसे छोटे उपग्रहों को अंतरिक्ष में पहुंचाने के लिए तैयार किया गया है।

विक्रम-1 का उद्देश्य छोटे सैटेलाइट लॉन्च बाजार में भारत की निजी कंपनियों की भागीदारी को मजबूत करना है।

निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में बड़ी छलांग

साल 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों और IN-SPACe के गठन के बाद यह भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जा रही है।

इससे पहले स्काईरूट एयरोस्पेस ने नवंबर 2022 में ‘विक्रम-S’ के जरिए देश का पहला निजी सब-ऑर्बिटल लॉन्च किया था। अब विक्रम-1 के सफल परीक्षण के बाद कंपनी छोटे उपग्रहों के लिए कमर्शियल और ऑन-डिमांड लॉन्च सेवाओं के क्षेत्र में अपनी दावेदारी मजबूत कर रही है।

भविष्य के लिए मजबूत आधार

स्काईरूट के सह-संस्थापक और सीईओ पवन कुमार चंदाना ने कहा कि विक्रम-1 के जमीनी परीक्षण के बाद अब वास्तविक उड़ान से मिलने वाला डेटा भविष्य के मिशनों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।

उन्होंने कहा कि यह मिशन भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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