—फर्जी माइक्रो फाइनेंस कंपनी बनाकर सीमांचल में फैलाया था जाल, वैशाली से सरगना गिरफ्तार; 50 हजार रुपये नकद, लैपटॉप और मोबाइल बरामद
किशनगंज, 30 अक्टूबर। फर्जी माइक्रो फाइनेंस कंपनी बनाकर 60 हजार रुपये का लोन दिलाने का झांसा देकर सैकड़ों महिलाओं से लाखों रुपये की ठगी करने वाले अंतरजिला गिरोह का किशनगंज पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के सरगना राजू कुमार को एसटीएफ और स्थानीय पुलिस के संयुक्त अभियान में वैशाली जिले के सराय थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार आरोपी के पास से 50 हजार रुपये नकद, एक लैपटॉप और एक मोबाइल फोन बरामद किया गया है। पुलिस के अनुसार, गिरोह फिनसपोर्ट माइक्रो फाउंडेशन के नाम से सीमांचल क्षेत्र में ठगी का नेटवर्क चला रहा था।
60 हजार रुपये का लोन दिलाने का दिया जाता था झांसा
मामले का खुलासा तब हुआ, जब ठाकुरगंज थाना क्षेत्र के भिमवालीस चौक वार्ड संख्या-4 निवासी लक्ष्मी देवी ने 8 मई 2026 को प्राथमिकी दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, कंपनी के एजेंट गांव-गांव जाकर चार-चार महिलाओं के समूह बनाते थे और प्रत्येक सदस्य को 60 हजार रुपये का लोन दिलाने का वादा करते थे।
इसके लिए लोन कार्ड बनवाने और घरेलू उपयोग के सामान खरीदने के नाम पर प्रत्येक महिला से चार से सात हजार रुपये तक जमा कराए जाते थे।
200 महिलाओं से वसूली के बाद कार्यालय बंद कर फरार
पुलिस के मुताबिक, 4 मई को जिलेबिया मोड़ स्थित कंपनी के कार्यालय में करीब 200 महिलाओं से रुपये जमा कराए गए थे। उन्हें 8 मई को सामान घर पहुंचाने और लोन देने का आश्वासन दिया गया था।
लेकिन तय तारीख पर जब महिलाएं कार्यालय पहुंचीं तो वहां ताला लटका मिला और सभी कर्मचारी फरार थे। इसके बाद ठाकुरगंज थाना कांड संख्या 148/26 दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की।
एसटीएफ के साथ कार्रवाई, सरगना वैशाली से गिरफ्तार
एसपी संतोष कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला आसूचना इकाई को तकनीकी और मानवीय सूचना जुटाने का निर्देश दिया। जांच में फिनसपोर्ट माइक्रो फाउंडेशन फर्जी कंपनी निकली।
इसके बाद एसडीपीओ-2 मनोज कुमार सिंह के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। टीम ने एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की मदद से वैशाली में छापेमारी कर गिरोह के सरगना राजू कुमार को गिरफ्तार कर लिया।
सोशल मीडिया से भर्ती कर गांवों में फैलाया था नेटवर्क
पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया कि गिरोह में बिहार के कई जिलों के दर्जनों लोग शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, गिरोह सोशल मीडिया पर नौकरी का विज्ञापन देकर ऑनलाइन इंटरव्यू के जरिए युवाओं की भर्ती करता था।
प्रशिक्षण के बाद उन्हें ग्रामीण इलाकों में कार्यालय खुलवाकर लोन के नाम पर लोगों से रुपये वसूलने के लिए भेजा जाता था। 10 से 15 दिनों तक प्रचार करने के बाद एक साथ रकम इकट्ठी कर आरोपी कार्यालय बंद कर फरार हो जाते थे।
अन्य आरोपितों की तलाश में छापेमारी जारी
पुलिस अब ठाकुरगंज, पोठिया समेत सीमांचल के अन्य इलाकों में हुई ठगी के मामलों की जांच कर रही है। गिरोह के बाकी सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।






