गुवाहाटी/नई दिल्ली। असम के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के पार्टी से इस्तीफा देने के बाद वह औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गये। इसके साथ ही असम विधानसभा चुनाव 2026 के ऐन मौके पर कांग्रेस पार्टी को एक और बड़ा झटका लगा है।
सांसद प्रद्युत बोरदोलोई बुधवार काे नई दिल्ली में असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया की मौजूदगी में औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। इस दाैरान केंद्रीय मंत्री पवित्र मार्घेरिटा, भाजपा सांसद प्रदान बरुवा, सांसद कामाख्या प्रसाद तासा आदि मौजूद थे।
यह स्थिति असम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा के भाजपा में शामिल होने के एक महीने से भी कम समय के अंदर उत्पन्न हुई है। इससे चुनावों से पहले कांग्रेस के नेतृत्व आधार में लगातार हो रही कमी को लेकर पार्टी के भीतर चिंताएं और बढ़ गई हैं।
बोरदोलोई के जाने से, कांग्रेस ने अब असम से अपने तीन मौजूदा सांसदों में से एक को खो दिया है। ऐसे अहम समय पर पार्टी की संसदीय मौजूदगी कमजाेर हुई है, जब सभी पार्टियां पूरे राज्य में अपने चुनावी अभियान तेज कर रही हैं। प्रद्युत बोरदोलोई नगांव लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे और पाला बदलने से पहले उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को अपना इस्तीफा बीती रात को सौंप दिया था।
इस दलबदल का समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह चुनावों से पहले बढ़ी हुई राजनीतिक सरगर्मी और रणनीतिक बदलावों के बीच हुआ है। बोरदोलोई के जाने को कांग्रेस के लिए एक प्रतीकात्मक और संगठनात्मक, दोनों तरह के झटके के तौर पर देखा जा रहा है। कांग्रेस असम में पहले से ही अंदरूनी चुनौतियों से जूझ रही है। बोरदोलोई एक प्रखर वक्ता के साथ ही असम विधानसभा चुनाव कांग्रेस कमेटी के घोषणा पत्र कमेटी के चेयरमैन भी थे। जिसके चलते उनका जाना कांग्रेस पार्टी के लिए एक बड़ा आघात माना जा रहा है।
इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने संकेत दिया कि बोरदोलोई ने टिकट बंटवारे को लेकर असंतोष जाहिर किया था। उन्होंने कहा कि वह टिकट बंटवारे से नाखुश थे। यह दुर्भाग्यपूर्ण था। उन्होंने यह भी कहा कि शायद अंदरूनी मतभेदों की वजह से ही उन्होंने यह फ़ैसला लिया होगा।
सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के पाला बदलने से न सिर्फ़ कांग्रेस की मौजूदा राजनीतिक ताकत को चोट पहुंची है, बल्कि इससे पार्टी के अंदरूनी तालमेल और रणनीति को लेकर भी कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। आने वाले हफ़्तों में जैसे-जैसे चुनावी मुकाबला तेज होगा, इसके दूरगामी असर भी देखने को मिल सकते हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने भाजपा में बोरदोलोई का स्वागत करते हुए कहा कि वे सार्वजनिक जीवन में 1975 से छात्र जीवन से ही कांग्रेस पार्टी से सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं। बोरदोलोई असम सरकार में कई कार्यकाल में महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाल चुके हैं। 2001 में तरुण गोगोई के पहले कार्यकाल में गृह मंत्री के रूप में प्रद्युत बोरदोलोई काफी प्रखरता के साथ काम कर चुके हैं। मुख्यमंत्री ने साथ ही कहा कि वर्तमान कांग्रेस में एक भी हिंदू नेता के रहने के लिए अब कोई जगह नहीं बची है। उन्होंने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस के सभी अच्छे नेताओं को हम भाजपा में धीरे-धीरे ला रहे हैं। इसकी शुरूआत वर्ष 2016 से हुई है। जो आगे भी जारी रहेगी।





