एयर एम्बुलेंस हादसे पर झारखंड सरकार सख्त, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा- होगी उच्च स्तरीय जांच

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चतरा/रांची। झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र में एयर एंबुलेंस क्रैश में सात लोगों की मौत के बाद राज्य सरकार सक्रिय हो गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी मंगलवार को चतरा सदर अस्पताल पहुंचे और स्थिति की विस्तृत समीक्षा की।

स्वास्थ्य मंत्री ने जिला उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक और सिविल सर्जन के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक तौर पर मामला विमानन सुरक्षा मानकों और उड़ान संचालन प्रक्रिया से जुड़ा प्रतीत हो रहा है। विशेषज्ञ टीम को जांच के लिए बुलाया गया है।

मंत्री ने बताया कि ब्लैक बॉक्स, फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (एफडीआर) और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (सीवीआर) की गहन जांच की जाएगी। इसके साथ ही मौसम की स्थिति, एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संवाद, विमान के मेंटेनेंस रिकॉर्ड और पायलटों के अनुभव की भी जांच होगी। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही सामने आने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

चतरा के पुलिस अधीक्षक सुमित कुमार अग्रवाल ने बताया कि तकनीकी जांच के लिए दिल्ली से विशेषज्ञों की टीम पहुंचेगी, जो ब्लैक बॉक्स बरामद करने का प्रयास करेगी, ताकि दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।

दरअसल, रांची से दिल्ली जा रही रेडबर्ड एयरवेज प्रा. लि. की एयर एंबुलेंस सोमवार देर रात चतरा जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र स्थित कसियातु जंगल में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे में विमान में सवार सभी सात लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने देर रात तक सभी शव बरामद कर लिए थे।

विमान ने बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी। उड़ान के कुछ समय बाद कोलकाता एटीसी से संपर्क टूट गया, जिसके बाद रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर को सक्रिय किया गया। खोजबीन के दौरान विमान का मलबा कसियातु जंगल में मिला। विमान में दो पायलट कैप्टन विवेक और कैप्टन सबराजदीप के अलावा मरीज संजय कुमार, उनकी पत्नी अर्चना देवी, भगीना ध्रुव कुमार, डॉ. विकास कुमार गुप्ता तथा पैरामेडिक सचिन कुमार मिश्रा सवार थे। सभी की मौके पर ही मौत हो गई थी।

प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में खराब मौसम को हादसे का संभावित कारण माना गया है। सोमवार देर शाम अचानक मौसम बिगड़ गया था। तेज हवा और झमाझम बारिश के बीच विमान अपने निर्धारित रूट से दाईं ओर डायवर्ट हो गया और संभवतः रास्ता भटक गया। ग्रामीणों ने जंगल से तेज धमाके की आवाज सुनने के बाद पुलिस-प्रशासन को सूचना दी।

बताया जा रहा है इस हादसे में मृतक संजय कुमार चंदवा के निवासी और व्यवसायी थे। पलामू स्थित उनके लाइन होटल में शॉर्ट सर्किट से आग लगने के कारण वे लगभग 65 प्रतिशत तक झुलस गए थे। उन्हें रांची के देवकमल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत गंभीर होने पर बेहतर इलाज के लिए दिल्ली ले जाया जा रहा था। उनके दो बेटे शुभम (17) और शिवम (13) हैं।

संजय के परिजनों के अनुसार, एयर एंबुलेंस सेवा के लिए कंपनी को पहले ही 8 लाख रुपये दिए जा चुके थे, जबकि 2.50 लाख रुपये शेष थे। आरोप है कि पूरी राशि नहीं मिलने पर कंपनी ने उड़ान भरने से इनकार कर दिया था। बाद में परिजन चंदवा जाकर शेष राशि की व्यवस्था कर दोबारा रांची लौटे और भुगतान के बाद ही विमान ने उड़ान भरी।

बहरहाल, इस हादसे के बाद से मृतकों के परिजनों में शोक की लहर है। राजनेताओं ने भी शोक-संवेदना वयक्त की है। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया और निष्पक्ष जांच की मांग की है। झारखंड के पूर्व श्रम मंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के नेता सत्यानंद भोक्ता ने भी घटना को दुखद बताते हुए सभी मृतकों के परिजनों को समान मुआवजा देने की मांग की है।

मृतकों में शामिल डॉ. विकास कुमार गुप्ता के पिता ने झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि रांची में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होतीं, तो इलाज के लिए दिल्ली क्यों जाना पड़ता।

पैरामेडिक सचिन कुमार मिश्रा के भाई ने भावुक होकर कहा, “मेरा छोटा भाई मेरे लिए सब कुछ था। पिता के निधन के बाद वही मेरा एकमात्र सहारा था।” उन्होंने बताया कि सचिन कई वर्षों से नर्सिंग पैरामेडिकल स्टाफ के रूप में कार्यरत थे और पिछले दो-तीन वर्षों से एंबुलेंस सेवा में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।

इस बीच राज्य सरकार ने सरकार ने मृतकों के परिजनों को हर संभव सहायता और मुआवजा देने का आश्वासन दिया है। हादसे की आधिकारिक जांच जारी है और पूरे राज्य में शोक का माहौल है।

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