–सुदेश महतो के प्रयासों का दावा, 2027 पंचायत चुनाव में आरक्षण लागू नहीं हुआ तो अवमानना की चेतावनी
रांची, 04 अप्रैल:
आजसू पार्टी ने दावा किया है कि झारखंड में पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण का रास्ता उसके प्रयासों से ही साफ हुआ है। पार्टी के अनुसार, केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश महतो की पहल से पहले भी पंचायत चुनाव में ओबीसी को बड़े स्तर पर आरक्षण मिला था।
पार्टी के केंद्रीय महासचिव संजय मेहता ने शनिवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि वर्ष 2022 में हेमंत सरकार ने साजिश के तहत पंचायत चुनाव में करीब 10 हजार पदों पर ओबीसी आरक्षण को समाप्त कर दिया था। इन पदों को सामान्य श्रेणी में बदलने से व्यापक आक्रोश पैदा हुआ था।
सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी याचिका
संजय मेहता ने बताया कि इस फैसले के खिलाफ आजसू पार्टी ने वर्ष 2022 में उच्चतम न्यायालय में रिट याचिका दायर की थी। यह याचिका पार्टी के सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी द्वारा दाखिल की गई थी। इसी याचिका के फैसले के आधार पर हाल ही में संपन्न नगर निकाय चुनाव में ओबीसी को आरक्षण दिया गया।
2027 पंचायत चुनाव में आरक्षण अनिवार्य
उन्होंने कहा कि आजसू के प्रयासों से अब पंचायत चुनाव में भी ओबीसी आरक्षण लागू किया जाएगा। वर्ष 2027 के पंचायत चुनाव में सरकार को ओबीसी को आरक्षण देना ही होगा। यदि ऐसा नहीं किया गया तो सरकार को अदालत की अवमानना का सामना करना पड़ सकता है।
ट्रिपल टेस्ट को लेकर सरकार पर आरोप
संजय मेहता ने आरोप लगाया कि हेमंत सरकार बिना ट्रिपल टेस्ट के ही पंचायत और नगर निकाय चुनाव कराना चाहती थी, ताकि ओबीसी को आरक्षण न देना पड़े। इसके खिलाफ सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया, जिसका कानूनी असर पड़ा।
उन्होंने कहा कि अदालत के निर्देश के बाद ही सरकार ने नगर निकाय चुनाव से पहले ओबीसी के लिए ट्रिपल टेस्ट कराया। हालांकि, इसमें भी देरी हुई क्योंकि ओबीसी आयोग के अध्यक्ष का पद लंबे समय तक खाली रखा गया था।
पार्टी ने दावा किया कि वह लगातार इस मुद्दे पर नजर बनाए हुए थी, जिसके चलते सरकार को ओबीसी आरक्षण लागू करने के लिए मजबूर होना पड़ा।





