SIR 2026: केवल भारतीय नागरिक ही बन सकेंगे मतदाता, सीईओ के. रवि कुमार की चेतावनी, विदेशी नागरिक न लें भाग

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रांची, 24 जून। झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम का उद्देश्य केवल पात्र भारतीय नागरिकों का सत्यापन और पंजीकरण सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि भारत में रह रहे विदेशी नागरिक अथवा दूसरे देशों की नागरिकता प्राप्त कर चुके प्रवासी इस प्रक्रिया में भाग न लें। एसआईआर की पूरी प्रक्रिया त्रुटिरहित, पारदर्शी और समावेशी मतदाता सूची तैयार करने के लिए संचालित की जा रही है।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी बुधवार को संथाल परगना दौरे के दूसरे दिन साहेबगंज जिले के सीमावर्ती प्रखंड बरहरवा स्थित प्लस-2 बरहरवा उच्च विद्यालय एवं सुदूरवर्ती आदिवासी बहुल प्रखंड सुंदर पहाड़ी में आयोजित बूथ लेवल एजेंट-2 (बीएलए-2) प्रशिक्षण कार्यक्रम का निरीक्षण कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने निर्वाचन प्रक्रिया में राजनीतिक दलों की सहभागिता और मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण की समीक्षा की।

पांच श्रेणियों के मतदाता प्रारूप सूची में नहीं होंगे शामिल

के. रवि कुमार ने बताया कि मतदाता सूची के प्रारूप प्रकाशन के समय एब्सेंट (अनुपस्थित), शिफ्टेड (स्थानांतरित), डेथ (मृत), डुप्लीकेट (दोहरे पंजीकरण) और रिफ्यूज टू साइन (हस्ताक्षर से इनकार) श्रेणी के मतदाताओं को शामिल नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि ‘रिफ्यूज टू साइन’ श्रेणी में दो प्रकार के मामले आते हैं। पहली श्रेणी में वे मतदाता शामिल हैं, जिन्होंने किसी अन्य देश की नागरिकता प्राप्त कर ली है लेकिन भारतीय मतदाता सूची से अपना नाम नहीं हटवाया है। दूसरी श्रेणी में वे विदेशी नागरिक आते हैं, जिन्होंने झूठी घोषणा देकर अवैध रूप से मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करा लिया है।

विदेशी नागरिक नहीं बन सकते मतदाता

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि भारतीय संविधान, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम-1950 और भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार विदेशी नागरिक भारत में मतदाता के रूप में पंजीकृत होने के पात्र नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रावधान को देश के सर्वोच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा है और स्पष्ट किया है कि विदेशी नागरिकों को मतदाता बनने का अधिकार प्राप्त नहीं है।

झूठी घोषणा देना दंडनीय अपराध

रवि कुमार ने चेतावनी देते हुए कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा-31 तथा अन्य प्रासंगिक कानूनों के तहत गणना फॉर्म (इन्यूमरेशन फॉर्म) पर हस्ताक्षर कर झूठी घोषणा देना दंडनीय अपराध है। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

उन्होंने झारखंड में रह रहे विदेशी नागरिकों से अपील की कि वे इन्यूमरेशन फॉर्म पर हस्ताक्षर किए बिना उसे बीएलओ को वापस कर दें। इसके बाद बीएलओ क्षेत्रीय सत्यापन के आधार पर अपनी रिपोर्ट दर्ज करेंगे।

बीएलए-2 की भूमिका अहम

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समावेशी बनाने में बीएलए-2 की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट मतदाता सूची के पुनरीक्षण में बीएलओ का सहयोग करेंगे, जिससे निष्पक्ष और अद्यतन मतदाता सूची तैयार की जा सके।

उन्होंने बताया कि अनकलेक्टेबल इन्यूमरेशन फॉर्म एएसडीडी (एब्सेंट, शिफ्टेड, डेथ एवं डुप्लीकेट) सूची का हिस्सा होंगे। यह सूची प्रत्येक मतदान केंद्र पर बीएलओ और बीएलए-2 की बैठक में प्रस्तुत की जाएगी तथा पूरी कार्यवाही ईसीआईनेट पोर्टल पर अपलोड की जाएगी।

5 अगस्त को प्रकाशित होगी प्रारूप मतदाता सूची

रवि कुमार ने बताया कि एएसडीडी सूची सभी मतदान केंद्रों, पंचायत भवनों और शहरी स्थानीय निकायों के कार्यालयों में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी। साथ ही प्रारूप मतदाता सूची के प्रकाशन के दौरान सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को इसकी प्रति उपलब्ध कराई जाएगी।

उन्होंने कहा कि प्रारूप मतदाता सूची के प्रकाशन की तिथि 5 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यह सूची जिला निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय तथा मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय की वेबसाइट पर भी सर्चेबल फॉर्मेट में उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि आम नागरिक और राजनीतिक दल इसकी जांच कर सकें।

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