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Middle East War: ईरान में धमाकों के बीच तेज कूटनीति, पाकिस्तान बना मध्यस्थ; क्या है ट्रंप का प्लान?

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नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच Iran और United States-Israel के बीच संभावित टकराव को रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं। इसी क्रम में Islamabad में तुर्की, सऊदी अरब, मिस्र और Pakistan के विदेश मंत्रियों की अहम बैठक शुरू हुई है, जिसे अब तक का सबसे बड़ा मध्यस्थता प्रयास माना जा रहा है।

पाकिस्तान की सक्रिय कूटनीति

बैठक से पहले Shehbaz Sharif ने Masoud Pezeshkian से करीब 90 मिनट बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच पिछले पांच दिनों में यह दूसरी बातचीत है। चर्चा का मुख्य उद्देश्य तनाव कम करना और विश्वास बहाली के रास्ते तलाशना रहा।

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ईरान की सख्त शर्तें

ईरान ने साफ किया है कि वह सीधे संवाद से पहले ठोस “विश्वास-बहाली उपाय” चाहता है। तेहरान का कहना है कि पिछली परमाणु वार्ताओं के दौरान भी हमले हुए, जिससे अमेरिका के इरादों पर संदेह गहरा गया है।

ईरान की प्रमुख मांगें:

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  • युद्ध का तत्काल अंत
  • हुए नुकसान का मुआवजा
  • भविष्य में हमले न होने की गारंटी
  • होर्मुज़ जलडमरूमध्य में रणनीतिक भूमिका की मान्यता

रियाद से इस्लामाबाद तक कूटनीतिक पहल

यह पहल अचानक नहीं है। इसकी नींव Riyadh में हुई बैठक में पड़ी थी, जिसे अब इस्लामाबाद में आगे बढ़ाया जा रहा है। पहले इस बैठक को Ankara में आयोजित करने की योजना थी, लेकिन पाकिस्तान की बढ़ती भूमिका के कारण स्थान बदला गया।

चीन का समर्थन, बढ़ती वैश्विक चिंता

China ने भी पाकिस्तान की मध्यस्थता का समर्थन किया है और ईरान को वार्ता प्रक्रिया में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया है। इससे संकेत मिलते हैं कि वैश्विक शक्तियां अब इस क्षेत्रीय पहल के पक्ष में खड़ी हो रही हैं।

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क्या है ट्रंप का संभावित प्लान?

हालांकि Donald Trump की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन कूटनीतिक हलकों में चर्चा है कि:

  • अमेरिका सीधे वार्ता की राह खोल सकता है
  • मध्यस्थ देशों के जरिए “बैक-चैनल डिप्लोमेसी” जारी है
  • ईरान पर दबाव और बातचीत—दोनों रणनीतियां साथ चल सकती हैं

आगे क्या?

अधिकारियों के मुताबिक अगले 48–72 घंटे बेहद अहम हैं। यह तय करेंगे कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत शुरू हो पाती है या नहीं। फिलहाल नजरें Washington, D.C. और Tehran के फैसलों पर टिकी हैं।

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