रांची, 16 अगस्त। जेपीएससी-जेएसएससी की विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलनरत छात्रों के साथ बातचीत के जरिए समाधान निकालने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और पहल की है। प्रशासन ने छात्रों को 17 अगस्त 2026 को दोपहर 2 बजे वार्ता के लिए आमंत्रित किया है। छात्रों को उनके विधिक सलाहकारों के साथ बातचीत में शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया है।
आंदोलन स्थल पहुंचे एसडीएम और एडीएम
रविवार को एसडीएम कुमार रजत और एडीएम, लॉ एंड ऑर्डर धनंजय कुमार जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम स्थित आंदोलन स्थल पहुंचे। अधिकारियों ने आंदोलनरत छात्रों से मुलाकात की और उनकी मांगों तथा आंदोलन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की।
इस दौरान प्रशासन की ओर से छात्रों को सरकार के वार्ता प्रस्ताव की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि छात्रों को अगले दिन दोपहर दो बजे बातचीत के लिए आमंत्रित किया गया है।
विधिक सलाहकारों के साथ वार्ता का प्रस्ताव
प्रशासन ने छात्रों को प्रस्ताव दिया है कि वे अपने विधिक सलाहकारों के साथ वार्ता में शामिल हो सकते हैं। सरकार की कोशिश है कि छात्रों की मांगों और उनके पक्ष को विस्तार से समझते हुए बातचीत के माध्यम से समाधान की दिशा में आगे बढ़ा जाए।
एसडीएम कुमार रजत ने कहा कि प्रशासन छात्रों के साथ संवाद के लिए तैयार है। उनके मुताबिक, बातचीत के जरिए ही सभी पक्षों के बीच सहमति बनाने और समाधान की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
पारदर्शिता और जांच समेत कई मांगें
जेपीएससी-जेएसएससी से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जारी आंदोलन के दौरान छात्र अपनी मांगों को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बना रहे हैं।
आंदोलनरत छात्रों की ओर से परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर पारदर्शिता, जांच और अन्य मुद्दों पर मांगें उठाई जा रही हैं।
अब छात्रों के रुख पर नजर
आंदोलन स्थल पर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों का पहुंचना और छात्रों को अगले दिन औपचारिक वार्ता के लिए आमंत्रित करना मौजूदा गतिरोध के बीच महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
17 अगस्त को दोपहर 2 बजे प्रस्तावित वार्ता में यदि छात्र शामिल होते हैं तो सरकार और आंदोलनरत छात्रों के प्रतिनिधियों के बीच उनकी मांगों पर विस्तार से चर्चा हो सकती है। अब सबकी नजर छात्रों के रुख पर है और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वार्ता से लंबे समय से जारी गतिरोध को खत्म करने की दिशा में कोई रास्ता निकलता है या नहीं।






