रांची। झारखंड में नियुक्ति परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की जांच कर रही सीआईडी के सामने मुख्य आरोपी अभय कुमार तिवारी के बयान से मामले में कई गंभीर दावे सामने आए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, तिवारी ने पूछताछ के दौरान वर्ष 2026 की CDPO भर्ती परीक्षा में कथित तौर पर पैसे लेकर कुछ अभ्यर्थियों को चयनित कराने की बात कही है। हालांकि, ये दावे फिलहाल आरोपी के बयान का हिस्सा हैं और इनकी स्वतंत्र कानूनी पुष्टि होना बाकी है।
10 से 12 लाख रुपये तक की डील का दावा
सीआईडी के अनुसार, तिवारी ने दावा किया कि परीक्षा से जुड़ी आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से कुछ अभ्यर्थियों के चयन के लिए 10 से 12 लाख रुपये तक की रकम तय की गई थी। कुछ मामलों में यह राशि 15 लाख रुपये तक पहुंचने का भी आरोप है।
तिवारी के बयान के मुताबिक, परीक्षा संचालन से जुड़ी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) की ओर से प्रति अभ्यर्थी कम से कम 10 लाख रुपये का कथित रेट तय किया गया था। तिवारी स्वयं TDPL में मार्केटिंग मैनेजर के तौर पर काम कर चुका है।
सीआईडी अब इन दावों की स्वतंत्र जांच कर रही है। जांच में कथित लेन-देन, बैंक खातों, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्यों और परीक्षा एवं इंटरव्यू से जुड़े दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है।
ख्यांग्ते और अजीता भट्टाचार्य पर भी लगाए आरोप
अभय तिवारी ने कथित तौर पर जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते और तत्कालीन सदस्य अजीता भट्टाचार्य की भूमिका का भी दावा किया है। उसके बयान के अनुसार, कुछ अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने के लिए इंटरव्यू बोर्ड में कथित ‘सेटिंग’ की गई थी।
बयान में ‘रजक’ नाम के एक अभ्यर्थी का उल्लेख करते हुए तिवारी ने दावा किया कि उसका इंटरव्यू बोर्ड एल. ख्यांग्ते की अध्यक्षता में था। आरोप है कि रामवीर सिंह नामक व्यक्ति के माध्यम से कथित तौर पर 15 लाख रुपये की व्यवस्था की गई।
इसी तरह काजल भारती नाम की एक सफल अभ्यर्थी के मामले में दावा किया गया कि उनका इंटरव्यू बोर्ड अजीता भट्टाचार्य का था और उनके निजी सहायक को कथित तौर पर 10 लाख रुपये दिए गए।
दो अन्य अभ्यर्थियों के नाम भी सामने आए
तिवारी के कथित बयान में प्रमोद कुमार पाठक और कुमारी डॉली जायसवाल के नाम भी सामने आए हैं। उसके अनुसार, इन मामलों में आईटीआई के प्रोजेक्ट मैनेजर ‘कृष्णा’ ने कथित तौर पर बिचौलिए की भूमिका निभाई थी।
अब लेन-देन और डिजिटल साक्ष्यों की जांच
सीआईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि CDPO भर्ती में कथित तौर पर कितने अभ्यर्थियों से रकम ली गई, पैसा किन लोगों के माध्यम से पहुंचा और परीक्षा या साक्षात्कार के किस स्तर पर कथित हेरफेर किया गया।
जांच एजेंसी बैंक खातों की आवाजाही, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, डिजिटल उपकरणों, दस्तावेजों और परीक्षा-साक्षात्कार के मूल रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। आरोपी के बयानों को उपलब्ध स्वतंत्र साक्ष्यों से मिलाया जा रहा है।
पूर्व JPSC अध्यक्ष जेल में, अजीता से पूछताछ
जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते को इस मामले में सीआईडी पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है और वह फिलहाल जेल में हैं। वहीं, तत्कालीन सदस्य अजीता भट्टाचार्य से भी सीआईडी पूछताछ कर चुकी है।
यदि जांच में अभय तिवारी के बयानों की स्वतंत्र साक्ष्यों से पुष्टि होती है, तो कथित नियुक्ति घोटाले का दायरा और बढ़ सकता है। फिलहाल सीआईडी की जांच जारी है और सामने आए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।






