पटना। बिहार विधानमंडल में बजट सत्र के चौथे दिन शुक्रवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान विधायकों के सवालों पर सरकारी जवाब में पदाधिकारियों की गलत रिपोर्ट पर शुक्रवार को बवाल हुआ। विपक्षी विधायकों के अलावा सत्ताधारी दल के विधायकों ने भी अफसरों द्वारा गलत रिपोर्ट भेजने की जांच कराने की मांग कर दी।
बिहार विधानसभा सत्र के चौथे दिन प्रभारी स्वास्थ्य मंत्री प्रमोद कुमार ने इसका जवाब देते हुए कहा कि गलत जानकारी देने वाले पदाधिकारी पर कार्रवाई होगी। एआईएमआईएम विधायक मुर्शिद आलम ने पलाशी पीएचसी की दुर्दशा की जानकारी सदन को दी। जवब में प्रभारी स्वास्थ मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने पीएचसी की उत्क्रमित होने की जानकारी देते कहा कि यहां 30 बेड वाला अस्पताल बनाकर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
प्रभारी स्वास्थ्य मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विधायक मुर्शिद आलम ने कहा कि पदाधिकारी गलत जवाब दे कर दिग्भ्रमित करना चाहते हैं। वो खुद स्थानीय लोगों के साथ इस पीएचसी का निरीक्षण कर चुके हैं, वो मात्र 6 बेड वाला अस्पताल है। उन्होंने कहा कि सदन स्वीकृति दे तो तस्वीर भी उपलब्ध करा सकता हूं।
प्रभारी स्वास्थ्य मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने विधायक के आरोप और विपक्ष की मांग पर कहा कि इस मामले की विभागीय जांच करा लेते हैं और अगर अधिकारी दोषी पाये गये तो कार्रवाई भी की जाएगी। इस पर विपक्ष के कई विधायक अपनी बात रखने लगे। तब विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने विधायकों को यह कह कर बैठने को कहा कि सरकार इस मामले पर कार्रवाई के लिए तैयार हैं। विधायक चाहे तो वे इस जांच खुद मौजूद रहे।
मधुबनी जिले के बाबूबरही विधानसभा क्षेत्र से जदयू विधायक मीना कुमारी ने अपने क्षेत्र के किसानों को बिजली कनेक्शन को लेकर पूछे गए सवाल पर मिले जवाब में सत्यता की कमी का हवाला देते हुए कहा कि पदाधिकारी ने गलत जवाब दिया है आपको, मैंने स्वंय क्षेत्र में इस मसले पर सर्वे कराया है। 190 किसानों से कनेक्शन का पैसा ले लिया गया है, लेकिन अभी तक पोल और तार नहीं लगे हैं। इस पर प्रभारी मंत्री ने कहा कि मात्र 40 किसानों के ही कनेक्शन बचे हुए हैं, इसपर मीना कुमारी ने गलत रिपोर्ट देने वाले अधिकारी के विरुद्ध उच्चस्तरिय जांच की मांग की।
इससे पहले बिहार विधानसभा में आज जवाब देने के क्रम में भी प्रभारी मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी फंस गये। सवाल था पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक नीतीश मिश्रा का । नीतीश मिश्रा का सवाल था, सीएचसी का मानक क्या है? मंत्री ने जवाब दिया- अगले वित्तीय वर्ष में जो भी है वो पूरा कर लिया जाएगा ।
प्रभारी मंत्री के जवाब से असंतुष्ट पूर्व मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि उनका मूल प्रश्न इतना है कि सीएचसी प्रखंड मुख्यालय का प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र होता है। 30 बेड ठीक से संचालित नहीं हो रहा, अतिरिक्त 20 बेड का भवन बना दिया गया, उद्घाटन भी हो गया। लेकिन डेढ़ सालों से बंद पड़ा है। सरकार ने जवाब दिया है कि दो चिकित्सक उपलब्ध हैं। इनमें एक मधुबनी में प्रतिनियुक्त हैं। एक संविदा के डॉक्टर हैं और एक दंत चिकित्सक हैं। लखनौर के जो प्रभारी हैं वो झंझारपुर पीएचसी के भी प्रभारी है। लेकिन पूर्व मंत्री ने वस्तुस्थिति बताते कहा कि यहां लगभग 16 ए ग्रेड के नर्स बहाल हुए। पर यहां एक भी नर्स नहीं है। ऐसे में 5 करोड़ की राशि से अस्पताल भवन की जरूरत क्या है?
प्रभारी स्वास्थ्य मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने कहा कि विभाग इस पीएचसी को सीएचसी में उत्क्रमित करने जा रही है वर्ष 2025 में पद सृजित की गई है। शीघ्र चिकित्सक ,नर्स और अन्य स्वास्थ्य सुविधाएं बहाल की जाएगी।





