नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्षी दलों के आठ सदस्यों के निलंबन और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने देने की मांग पर हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही पहले 12 बजे तक और फिर 02 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी। इस दौरान हंगामे के बीच सदन ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को बिना जवाब के ही ध्वनिमत से पारित कर दिया।
लोकसभा की कार्यवाही गुरुवार को पूर्वाह्न 11 बजे शुरू होते ही अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि उन्हें कई स्थगन प्रस्तावों की सूचना मिली है, लेकिन किसी को अनुमति नहीं दी गई। इस दौरान नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्यमंत्री श्रीपद यशो नाईक, सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री डॉ. एल. मुरुगन और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्यमंत्री सुरेश गोपी ने अपने-अपने मंत्रालयों से जुड़े दस्तावेज सदन के पटल पर रखे।
कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्य हाथों में बैनर, पोस्टर और तख्तियां लेकर सदन के बीचोंबीच पहुंच गए और सरकार विरोधी नारे लगाने लगे। लोकसभा अध्यक्ष ने विपक्षी सदस्यों को चेतावनी दी कि हाथों में तख्तियां लेकर आने पर उन्हें बोलने का अवसर नहीं दिया जाएगा। इसके बावजूद विपक्षी सदस्यों का हंगामा जारी रहा। इसके बाद राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर अनेक संशोधन प्रस्तुत किए गए, जिन्हें मतदान के बाद अस्वीकृत कर दिया गया। इस दौरान हंगामे के बीच ही धन्यवाद प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्षी सदस्यों से अपील की कि वे सदन को चलने दें और सभी को बजट पर बोलने का अवसर दें। उन्होंने कहा कि लगातार हंगामा करना सदन का अपमान है लेकिन विपक्षी सदस्यों के विरोध के चलते कार्यवाही को 2 बजे तक स्थगित कर दिया गया।
गौरतलब है कि बुधवार को विपक्ष की महिला सदस्य बैनर लेकर प्रधानमंत्री की सीट के पास पहुंच गई थीं, जिसके चलते कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी थी। हालांकि उस समय प्रधानमंत्री सदन में मौजूद नहीं थे। अध्यक्ष बिरला ने बीते दिन हुई घटनाओं पर नाराजगी जताते हुए कहा था कि विपक्षी सदस्य सत्ता पक्ष की वेल तक पहुंच गए थे, जो सदन की मर्यादा के अनुरूप नहीं है। सदन की गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है और यदि इसे खत्म किया जाएगा तो सदन चलाना संभव नहीं हो सकेगा।





