कट्टरपंथ पर करारा प्रहार: जिहाद के लिए युवाओं की भर्ती मामले में सैयद एम इदरीश को 10 साल की सजा

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कोलकाता। भारत के खिलाफ ‘जिहाद’ के लिए मुस्लिम युवाओं को तैयार करने और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के लिए भर्ती करने के मामले में कोलकाता की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की स्पेशल कोर्ट ने गुरुवार का सईद एम. इदरीस को 10 साल की सजा और 70 हजार का जुर्माना भी लगाया।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के मुताबिक, सैयद एम. इदरीश (33) पाकिस्तान के इशारे पर पश्चिम बंगाल में लश्कर-ए-तैयबा का भर्ती मॉड्यूल चला रहा था। वह मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित कर आतंकी संगठन में शामिल होने के लिए उकसाता था। जांच में सामने आया कि इदरीश भारत में लश्कर-ए-तैयबा के नेटवर्क को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभा रहा था।

एनआईए अधिकारियों ने बताया कि कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिला निवासी सैयद एम. इदरीश भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया है। अप्रैल, 2020 में एनआईए ने यह मामला पश्चिम बंगाल पुलिस से अपने हाथ में लिया था और जांच के दौरान इदरीश को एक अन्य आरोपित के साथ गिरफ्तार किया था।

इस मामले में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ी एक अन्य आरोपित तानिया परवीन को मार्च, 2020 में पश्चिम बंगाल पुलिस ने उत्तर 24 परगना जिले के बादुरिया से गिरफ्तार किया था। उसके पास से आतंकी विचारधारा को बढ़ावा देने वाली प्रचार सामग्री बरामद हुई थी, जिसमें मुस्लिम युवाओं को भारत के खिलाफ ‘जिहाद’ के लिए उकसाया जा रहा था।

एनआईए के अनुसार, इस आतंकी भर्ती मॉड्यूल से जुड़े अन्य आरोपितों के खिलाफ अदालत में सुनवाई अभी जारी है। एजेंसी ने कहा कि देश की सुरक्षा के खिलाफ साजिश रचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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