बीजेपी की युवा ब्रिगेड से राष्ट्रीय अध्यक्ष तक, बहुत दिलचस्प है नितिन नवीन का सियासी सफर

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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर निर्विरोध निर्वाचित 45 वर्षीय नितिन नबीन पार्टी के अब तक के सबसे युवा अध्यक्ष हैं।

भाजपा के केंद्रीय मुख्यालय में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव के निर्वाचन अधिकारी डॉ. के. लक्ष्मण ने मंगलवार को पूर्वाह्न 11 बजे उनके निर्वाचन की आधिकारिक घोषणा की। प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं उन्हें अपना बॉस कहकर संबोधित किया। वे जगत प्रकाश नड्डा के स्थान पर अध्यक्ष बने हैं।

बांकीपुर विधानसभा सीट से पांच बार के विधायक

नितिन नबीन दिग्गज भाजपा नेता नवीन किशोर सिन्हा के बेटे हैं। नितिन नबीन पटना की बांकीपुर सीट से पांचवीं बार विधायक हैं। वर्ष 2006 में उन्होंने पहली बार उपचुनाव में जीत हासिल की थी। उन्होंने 2010, 2015, 2020 और 2025 के विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज की। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल की उम्मीदवार रेखा कुमारी को 51,936 मतों के अंतर से हराया था।

नितिन नबीन को विगत 14 दिसंबर को पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था और अब वे निर्वाचन के बाद पूर्णकालिक अध्यक्ष बने हैं। वे बिहार विधानसभा के पांच बार सदस्य रह चुके हैं और बिहार सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। पार्टी के बीच उनको संगठनात्मक कुशलता और प्रशासनिक अनुभव के लिए जाना जाता है।

नितिन नबीन के पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा भाजपा के वरिष्ठ नेता थे। उनके निधन के बाद जब उपचुनाव हुआ, तब जनता ने उसी परिवार के बेटे पर भरोसा जताया। यही वह क्षण था जहां नितिन नबीन की राजनीतिक यात्रा शुरू हुई। उसके बाद जो हुआ, वह बिहार की राजनीति का एक चमकता हुआ अध्याय बन गया। बांकीपुर सीट से वह लगातार जीत रहे हैं।

नबीन का जन्म 23 मई 1980 को अविभाजित बिहार के रांची (अब झारखंड) में हुआ था। उनके माता-पिता स्वर्गीय नवीन किशोर सिन्हा भाजपा के वरिष्ठ नेता और पटना पश्चिम से बिहार विधानसभा के चार बार विधायक रहे थे। उनकी माता मीरा सिन्हा थीं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा सेंट माइकल हाई स्कूल, पटना से पूरी हुई, जहां से उन्होंने 1996 में सीबीएसई की 10वीं कक्षा की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद उन्होंने सीएसकेएम पब्लिक स्कूल, नई दिल्ली से माध्यमिक शिक्षा प्राप्त की और 1998 में इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की। उनका विवाह दीपमाला श्रीवास्तव से हुआ है और उनके एक बेटा और एक बेटी हैं।

जिम्मदेरियों से है पुरानी दोस्ती

नितिन नबीन ने बिहार सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में सड़क निर्माण, शहरी विकास एवं आवास और कानून जैसे महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार भी संभाला है। उनकी पहचान बिहार में पथ निर्माण मंत्री के रूप में एक युवा, ऊर्जावान और काम करने वाले नेता की बनी है लेकिन यह भी उतना ही सच है कि राजनीति के इस लंबे सफर में उनका पहला कदम विरासत की ताकत से उठाया गया था, जहां पिता की पहचान ने बेटे को राजनीति की भीड़ में अलग खड़ा कर दिया।

नितिन नबीन युवा ऊर्जा, आधुनिक सोच और सक्रिय नेतृत्व का उदाहरण हैं। उनको इस बात का श्रेय भी दिया जाता है कि उन्होंने अपने क्षेत्र को शहरी विकास की नई धाराओं से जोड़ने का प्रयास किया है। चाहे सड़कें हों, बिजली, जलापूर्ति या ट्रैफिक व्यवस्था, हर मुद्दे पर उन्होंने सतत निगरानी रखी।

अपने विधायी करियर के साथ-साथ, उन्होंने पार्टी संगठन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जहां उन्होंने राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर नेतृत्व के पद संभाले हैं। उन्हें सिक्किम और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारियां सौंपी गयीं। नितिन युवा हैं, राजनीति में उन्हें लम्बे सफर के लिए तैयार किया जा रहा है। नितिन के अध्यक्ष बनने से बिहार भाजपा में भी यह साफ संदेश केंद्रीय नेतृत्व ने दिया है कि जो चुपचाप रहकर संगठन का काम पूरी निष्ठा-ईमानदारी के साथ करेगा उस पर ही भाजपा भरोसा करेगी।

चुनौतियां भी कम नहीं…
दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी का सबसे बड़ा नेता बनना मानों एक कांटों भरा ताज पहनना है। भारतीय जनता पार्टी के गठन के 45 साल के सियासी इतिहास में बीजेपी में 11 राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं। 45 वर्षीय नीतिन, पार्टी के सबसे कम उम्र के राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे, ऐसे समय में जब पार्टी के सामने पांच राज्यों में चुनाव जीतने की सबसे बड़ी चुनौती है।

नबीन ऐसे समय अध्यक्ष बन रहे हैं जब पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और असम में विधानसभा के चुनाव होने हैं। इनमें से पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल ऐसे राज्य हैं, जहां बीजेपी आज तक सरकार नहीं बना पाई है। वहीं बीजेपी के सामने असम में तीसरी बार और पुडुचेरी में दूसरी बार सरकार बनाने की चुनौती है।

दक्षिण भारत की ‘अग्निपरीक्षा’
वहीं, दक्षिण में कमल का उदय कराना नितिन नबीन की सबसे बड़ी चुनौती होगी। तमिलनाडु और केरल में बीजेपी का सरकार बनाना आज भी पार्टी के लिए एक सपना है। बात करें तमिलनाडु की तो बीजेपी ने स्टालिन सरकार को सत्ता से हटाने के लिए एआईडीएमके के साथ हाथ मिलाया है। पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने तमिलनाडु में 23 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन किसी सीट पर उसे जीत नहीं मिली थी।

वहीं, बात करें केरल की, तो यह एक मात्र राज्य है, जहां लेफ्ट की सरकार है. हालांकि, स्थानीय निकाय चुनाव में बीजेपी को मुस्कुराने का मौका मिला। लगभग 600 स्थानीय निकायों में बीजेपी के पार्षदों की जीत हुई. वहीं, तिरुवनंतपुरम में बीजेपी नेता वीवी राजेश ने मेयर पद की जिम्मेदारी भी संभाल ली है।

नितिन नबीन अब बीजेपी अध्यक्षों की उस श्रृंखला में शामिल हो गए हैं, जिसकी शुरुआत 1980 में अटल बिहारी वाजपेयी से हुई थी। इसके बाद लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कुशाभाऊ ठाकरे, बंगारू लक्ष्मण, वेंकैया नायडू, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, अमित शाह, और जेपी नड्डा जैसे दिग्गजों ने पार्टी की कमान संभाली। अब इस लिस्ट में सबसे युवा नाम के रूप में नितिन नबीन दर्ज हो गया है।

  • अटल बिहारी वाजपेई (1980-1986)
  • लाल कृष्ण आडवाणी (1986-1990, 1993-1998, 2004-2005)
  • मुरली मनोहर जोशी (1991 – 1993)
  • कुशाभाऊ ठाकरे (1998-2000)
  • बंगारू लक्ष्मण (2000-2001)
  • के. जना कृष्णमूर्ति (2001-2002)
  • एम. वेंकैया नायडू (2002-2004)
  • नितिन गडकरी (2010-2013)
  • राजनाथ सिंह (2005-2009, 2013-2014)
  • अमित शाह (2014-2017, 2017-2020)
  • जगत प्रकाश नड्डा (2020-2026)

भले ही नितीन नबीन के आगे चुनौतियां कई हैं, लेकिन इतिहास गवाह है कि सोशल मीडिया से लेकर पोलिंग बूथ तक, बीजेपी कार्यकर्ताओं की मेहनत ने कई असंभव से लगने वाले काम को संभव कर दिखाया है।

पिछले 45 सालों में बीजेपी के कई दिग्गज नेताओं ने अपनी पूरी जिंदगी पार्टी के लिए झोंक दी। अब, नितिन नबीन को पार्टी ने यह जिम्मेदारी देकर साबित कर दिया है कि बीजेपी भविष्य की राजनीति को ध्यान में रखते हुए नई लीडरशिप तैयार कर रही है।

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