खूंटी। पड़हा राजा एवं अबुआ झारखंड पार्टी के केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष सोम मुंडा की हत्या के विरोध में आदिवासी संगठनों द्वारा 17 जनवरी को संपूर्ण झारखंड बंद का आह्वान किया गया है । यह बंद हत्या के आठ दिनों बाद भी हत्याकांड के मुख्य साजिशकर्ता और शूटरों को पकड़ने में पुलिस प्रशासन की विफलता के विरोध में बुलाया गया है। बंद का आह्वान आदिवासी समन्वय समिति (खूंटी) सहित लगभग 30 आदिवासी संगठनों ने संयुक्त रूप से किया है।
इस संबंध में आदिवासी समन्वय समिति द्वारा गुरुवार को खूंटी के करम अखरा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सभी वर्ग के लोगों से प्रस्तावित झारखंड बंद में सहयोग करने की अपील की गई। बताया गया कि बंद से स्कूल, अस्पताल, दवा दुकान समेत अन्य आवश्यक सेवाओं को मुक्त रखा गया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में आदिवासी समन्वय समिति के अध्यक्ष चंद्र प्रभात मुंडा ने कहा कि जल जंगल जमीन एवं आदिवासी समाज के लिए जीवन भर संघर्ष करने वाले पड़हा राजा सोमा मुंडा की हत्या से आदिवासी समाज के साथ ही सामाजिक व्यवस्था को गहरा आघात लगा है।
हत्याकांड के इतने दिनों बाद भी अभी तक हत्याकांड के मुख्य साजिशकर्ता और शूटरों की गिरफ्तारी न होने से सामाजिक संगठनों में आक्रोश फैल रहा है। सामाजिक संगठनों को यह आशंका है कि पूर्व में हुई कई चर्चित हत्याकांडों की तरह सोमा मुंडा हत्याकांड की जांच में भी पुलिस प्रशासन द्वारा लीपापोती ना कर दी जाए। उन्होंने शासन प्रशासन से सोमा मुंडा की हत्या में शामिल मुख्य अपराधियों को अविलंब गिरफ्तार करने, अनावश्यक रूप से किसी निर्दोष को नहीं पकड़ने, दिवंगत सोमा मुंडा के स्वजनों को जल्द समुचित मुआवजा देने और सोमा मुंडा द्वारा संचालित स्कूल के बच्चों को गोद लेकर उनकी शिक्षा की समुचित व्यवस्था करने की मांग की है।

आदिवासी समन्वय समिति के संयोजक मार्शल बारला ने भी हत्याकांड के बाद अब तक पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि हत्याकांड के आठ दिन बाद भी मुख्य साजिशकर्ता और शूटरों की गिरफ्तारी ना होना पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मामले की लीपापोती करने की कोशिश की गई तो तीव्र आंदोलन छेड़ा जाएगा। बताया गया कि बंद से पूर्व शुक्रवार शाम खूंटी में भगत सिंह चौक से नेताजी चौक तक मशाल जुलूस निकाला जाएगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में आदिवासी समन्वय समिति के संयोजक महादेव मुंडा, दुर्गावती ओड़ेया, जॉनसन होरो, चार्ल्स पाहन, बाहा लिंडा समेत आदिवासी संगठनों के अन्य लोग शामिल थे।





