झारखंड की मातृभाषाओं को सम्मान देकर तैयार होगी शिक्षा नीति, 12वीं से पहले अंग्रेजी स्पोकन कक्षाएं अनिवार्य

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—मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने अधिकारियों को दिया निर्देश, स्थानीय भाषाओं के संरक्षण के साथ कौशल और डिजिटल दक्षता पर भी रहेगा जोर

रांची, 04 नवंबर। झारखंड की भाषाई, सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता को ध्यान में रखते हुए राज्य की शिक्षा नीति तैयार की जाएगी। इसमें विद्यार्थियों की मातृभाषा और स्थानीय भाषाओं को सम्मान देने के साथ उनके ज्ञान, कौशल और अभिव्यक्ति की क्षमता विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि विद्यार्थियों के 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने से पहले अंग्रेजी बोलने और संवाद करने की समुचित व्यवस्था अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री बुधवार को झारखंड मंत्रालय में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की ओर से झारखंड राज्य भाषा शिक्षा नीति के प्रारूप पर आयोजित प्रस्तुतीकरण बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए सक्षम, आत्मविश्वासी और प्रतिस्पर्धी बनाना भी होना चाहिए।

मातृभाषा में पढ़ाई से बच्चों की समझ और अभिव्यक्ति होगी बेहतर

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के बच्चे घर और समुदाय में अपनी मातृभाषा तथा स्थानीय भाषाओं का इस्तेमाल करते हैं, जबकि विद्यालयों में पढ़ाई प्रायः हिंदी या अंग्रेजी माध्यम से होती है। भाषाओं के इस अंतर के कारण शुरुआती कक्षाओं में बच्चों की समझ, अभिव्यक्ति, सहभागिता और सीखने की गति प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि झारखंड की भाषाई विविधता राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान है। इसे शिक्षा व्यवस्था से जोड़कर ऐसी पद्धति विकसित की जाए, जिससे विद्यार्थी अपनी भाषा में सहजता से सीख सकें। साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में नए प्रयोगों को भी बढ़ावा मिले।

12वीं से पहले अंग्रेजी बोलने का आत्मविश्वास विकसित करने पर जोर

हेमन्त सोरेन ने विद्यार्थियों के लिए अंग्रेजी स्पोकन की कक्षाएं संचालित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं और खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए विद्यार्थियों को देश के अलग-अलग राज्यों में जाना पड़ता है। ऐसे में अंग्रेजी बोलने और संवाद करने का आत्मविश्वास उनके लिए काफी लाभकारी साबित होगा।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विद्यार्थियों के 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने से पहले ही अंग्रेजी स्पोकन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि वे भाषाई रूप से दक्ष और आत्मविश्वासी बन सकें।

कौशल आधारित शिक्षा में हॉकी को शामिल करने पर विचार

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को कौशल आधारित शिक्षा से जोड़ने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के साथ बच्चों की रुचि, प्रतिभा और व्यावहारिक कौशल का विकास होना चाहिए।

उन्होंने कौशल आधारित शिक्षा के तहत हॉकी को भी शामिल करने पर विचार करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के बच्चे-बच्चियां हॉकी के क्षेत्र में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें शिक्षा के माध्यम से अपनी खेल प्रतिभा निखारने और आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिल सकेंगे।

डिजिटल दक्षता और भविष्य की जरूरतों पर रहेगा ध्यान

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को डिजिटल रूप से दक्ष बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा नीति ऐसी होनी चाहिए, जिससे विद्यार्थियों को वर्तमान के साथ-साथ भविष्य में भी किसी तरह की परेशानी न हो। कक्षाओं में शिक्षण व्यवस्था से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं की आवश्यकताओं तक को ध्यान में रखकर नीति तैयार की जाए।

उन्होंने कहा कि शिक्षा नीति संवर्धनात्मक बहुभाषिकता के सिद्धांत पर आधारित होनी चाहिए। इसके तहत पहली भाषा को हटाए बिना दूसरी और तीसरी भाषा को जोड़कर विद्यार्थियों को शिक्षा देने की व्यवस्था की जाए। मातृभाषा, हिंदी और अंग्रेजी को परस्पर सहयोगी भाषा समूह के रूप में देखते हुए नीति को अंतिम स्वरूप दिया जाए।

तीन शैक्षणिक चरणों में तैयार किया गया नीति का प्रारूप

बैठक में अधिकारियों ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बताया कि झारखंड राज्य भाषा शिक्षा नीति तैयार करने के लिए वर्ष 2025 में भाषा शिक्षा नीति निर्माण समिति का गठन किया गया था। समिति ने झारखंड सहित अन्य राज्यों की शिक्षा पद्धतियों का अध्ययन करने के बाद नीति का प्रारूप तैयार किया है।

प्रारूप में तीन प्रमुख शैक्षणिक चरण निर्धारित किए गए हैं। इनमें पूर्व बाल्यावस्था शिक्षा से कक्षा दूसरी तक, कक्षा तीसरी से पांचवीं तक और कक्षा छठी से 12वीं तक की शिक्षा शामिल है। इन तीनों चरणों में विद्यार्थियों की मातृभाषा और स्थानीय भाषाओं को स्कूली शिक्षा में समाहित करने पर विशेष ध्यान दिया गया है, ताकि बच्चे अपनी भाषा में सहजता से पढ़ाई कर सकें और बेहतर शैक्षणिक उपलब्धियां हासिल कर सकें।

अधिकारियों ने बताया कि इस नीति से राज्य की स्थानीय भाषाओं का संरक्षण, संवर्धन और व्यापक उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा। इससे विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया अधिक सहज और प्रभावी बनेगी तथा स्कूली शिक्षा में स्थानीय भाषाओं के इस्तेमाल को नई दिशा मिलेगी। बैठक में नीति के विभिन्न प्रावधानों और प्रारूप के बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद

बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह, झारखंड शिक्षा परियोजना के राज्य परियोजना निदेशक शशि रंजन, टीआरआई के निदेशक आलोक शिकारी कच्छप, जैक के सचिव एसडी तिग्गा सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे।

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