नई दिल्ली, 03 नवंबर । बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। इस दौरान राज्य में औद्योगिक विकास, निवेश, रोजगार सृजन और आधारभूत संरचना के विस्तार से जुड़ी छह प्रमुख परियोजनाओं के लिए वन भूमि के उपयोग संबंधी प्रस्तावों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने इन परियोजनाओं के लिए आवश्यक स्वीकृतियां देने की प्रक्रिया में तेजी लाने का अनुरोध किया।
जमुई में सौर ऊर्जा और इस्पात उद्योग का प्रस्ताव
बैठक में जमुई जिले में प्रस्तावित सौर ऊर्जा और इस्पात उद्योगों की स्थापना का मुद्दा प्रमुखता से उठा। इन परियोजनाओं के लिए कुल 9,000 एकड़ भूमि की आवश्यकता बताई गई है, जिसमें से 4,340 एकड़ वन भूमि के अपयोजन की स्वीकृति मांगी गई है।
वहीं, गयाजी जिले के डोभी में अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारे के तहत इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया। इसके लिए कुल 1,600 एकड़ भूमि की जरूरत है, जिसमें 1,308.72 एकड़ वन भूमि शामिल है।
गयाजी में चिड़ियाघर, मुंगेर में औद्योगिक क्षेत्र की योजना
गयाजी में 45.9 हेक्टेयर वन भूमि पर चिड़ियाघर बनाने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। इसके लिए केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से आवश्यक अनुमोदन प्राप्त करने का प्रस्ताव रखा गया।
मुंगेर जिले के तारापुर अनुमंडल के संग्रामपुर में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की योजना पर भी विचार-विमर्श हुआ। इसके लिए कुल 114 एकड़ भूमि में से 84 एकड़ जंगल-झाड़ भूमि के अपयोजन की स्वीकृति मांगी गई है।
इसके अलावा मुंगेर के भीमबांध क्षेत्र में इको-टूरिज्म की संभावनाओं को विकसित करने के लिए आवश्यक वैधानिक और पर्यावरणीय स्वीकृतियां प्राप्त करने का प्रस्ताव भी केंद्रीय मंत्री के समक्ष रखा गया।
वाल्मीकि व्याघ्र आरक्ष में सड़क और एलिवेटेड कॉरिडोर पर चर्चा
पश्चिम चंपारण जिले में वाल्मीकि व्याघ्र आरक्ष के अंतर्गत 5.8 किलोमीटर लंबे मदनपुर-पनियहवा पथ की मरम्मत और इसे प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर के रूप में विकसित करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई।
पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास पर जोर
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाकर परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। इसके लिए प्रतिपूरक वनीकरण से जुड़े वैधानिक प्रावधानों और पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन से बिहार में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार होगा। इससे पर्यटन और आधारभूत संरचना के विकास को भी गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से सभी प्रस्तावों का शीघ्र परीक्षण करने और नियमानुसार आवश्यक स्वीकृतियों की प्रक्रिया में तेजी लाने में सहयोग का अनुरोध किया।






