बिहार में खाद्य सुरक्षा पर बड़ा एक्शन: 531 प्रतिष्ठानों की जांच, 15 के खिलाफ केस; दो लाइसेंस निलंबित

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—केएफसी, बारबेक्यू नेशन और ब्लिंकिट समेत कई प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई, हजारों लीटर पैकेज्ड पेयजल और बड़ी मात्रा में मिठाइयां जब्त

पटना। बिहार में आम लोगों को सुरक्षित, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए खाद्य संरक्षा विभाग ने राज्यव्यापी जांच अभियान तेज कर दिया है। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के निर्देश पर चलाए जा रहे इस अभियान के तहत अब तक राज्य के विभिन्न जिलों में 531 खाद्य प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया गया है। अनियमितताएं मिलने पर दो प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं, जबकि 15 प्रतिष्ठानों के खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई शुरू की गई है।

होटल, रेस्तरां से लेकर डेयरी और ऑनलाइन स्टोर तक जांच

खाद्य संरक्षा विभाग की टीमें होटल, रेस्तरां, मिठाई की दुकानों, डेयरी इकाइयों, पैकेज्ड पेयजल संयंत्रों और ई-कॉमर्स स्टोर की जांच कर रही हैं। इस दौरान खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, सुरक्षित भंडारण, रसोई की साफ-सफाई, वैध लाइसेंस और खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन की पड़ताल की जा रही है।

अब तक राजधानी पटना में सर्वाधिक 87 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया है। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने स्पष्ट किया है कि आम जनता के स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

पटना में छापेमारी, बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री जब्त

राजधानी के संपतचक, गौरीचक, राजीव नगर, फ्रेजर रोड, एसपी वर्मा रोड, बोरिंग कैनाल रोड और परसा बाजार समेत कई इलाकों में विशेष जांच अभियान चलाया गया। इस दौरान सड़ा हुआ और दुर्गंधयुक्त पनीर, बासी मिठाइयां, एक्सपायरी दूध तथा अन्य असुरक्षित खाद्य उत्पाद जब्त किए गए।

विभाग के अनुसार, पटना में करीब 15,340 लीटर अवैध पैकेज्ड पेयजल, 3,456 किलोग्राम मिल्क केक, 155 किलोग्राम गुलाब जामुन, 96 किलोग्राम रसगुल्ला और 170 किलोग्राम मिश्रित मिठाई व पनीर जब्त किए गए।

विजय नगर स्थित संतोष स्वीट्स से 3,344 किलोग्राम मिल्क केक, जिसकी कीमत करीब 5.24 लाख रुपये बताई गई है, और 112 किलोग्राम पेड़ा जब्त किया गया।

केएफसी, बारबेक्यू नेशन और ब्लिंकिट पर भी कार्रवाई

जांच अभियान के दौरान कई चर्चित खाद्य प्रतिष्ठानों और ऑनलाइन डिलीवरी से जुड़े स्टोरों में भी अनियमितताएं सामने आने की जानकारी दी गई है।

  • बारबेक्यू नेशन: बुद्ध मार्ग स्थित आउटलेट से 30 किलोग्राम दुर्गंधयुक्त पनीर और चावल नष्ट किए गए। पैक्ड चिकन के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई गई। फ्रेजर रोड स्थित आउटलेट में ब्रेड के पैकेट में कीड़े मिलने और 20 लीटर जला हुआ तेल जब्त किए जाने की बात सामने आई।
  • केएफसी: बोरिंग कैनाल रोड स्थित आउटलेट में 835 प्लास्टिक गिलासों के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई।
  • ब्लिंकिट और ‘9 टू 9’ स्टोर: यहां से एक्सपायरी अमूल दूध, घी, आटा और मसाले जब्त कर नष्ट किए गए।

बिना लाइसेंस वाली पेयजल इकाइयां सील

खाद्य संरक्षा विभाग ने बिना लाइसेंस संचालित पैकेज्ड पेयजल इकाइयों के खिलाफ भी कार्रवाई की। महादेव इंटरप्राइजेज और त्रिवेणी नीर जैसी इकाइयों को सील किए जाने की जानकारी दी गई है।

इसके अलावा होटल गार्गी ग्रैंड, पाटलिपुत्र एग्जॉटिका, द पनाश और होटल मौर्या में साफ-सफाई से जुड़ी कमियां मिलने पर 14 दिनों के भीतर सुधार करने का नोटिस जारी किया गया।

दूसरे जिलों में भी जांच, वैशाली में बड़ी जब्ती

पटना के अलावा वैशाली, मुजफ्फरपुर, सुपौल, समस्तीपुर, सीवान, गोपालगंज, रोहतास और कैमूर समेत कई जिलों में भी अभियान चलाया गया।

वैशाली में बिना लाइसेंस संचालित इकाइयों से 22,992 लीटर पैकेज्ड पेयजल और 328 किलोग्राम मिलावटी पनीर जब्त किए जाने की जानकारी दी गई है। मुजफ्फरपुर, शिवहर, सहरसा और समस्तीपुर में भी खराब पनीर, एक्सपायरी दूध और मिठाइयों को नष्ट कराया गया।

पिछले तीन महीनों के दौरान रोहतास में 41, सारण में 40, गोपालगंज में 37, सीवान में 27, गया में 26, वैशाली में 24 और मुजफ्फरपुर में 20 प्रतिष्ठानों की जांच की गई।

निरीक्षण रिपोर्ट अपलोड करना अनिवार्य, उल्लंघन पर जुर्माने का प्रावधान

खाद्य सुरक्षा जांच को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए अधिकारियों को 14 दिनों का प्रारंभिक प्रशिक्षण और 26 दिनों का कार्यस्थल प्रशिक्षण देकर जिलों में खाद्य संरक्षा अधिकारी के रूप में तैनात किया गया है। सभी निरीक्षण रिपोर्ट खाद्य सुरक्षा विभाग के ‘FoSCoS’ पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य किया गया है।

विभाग ने कारोबारियों को खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, स्वच्छता और भंडारण से जुड़े मानकों का सख्ती से पालन करने की चेतावनी दी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, खाद्य संरक्षा मानकों के उल्लंघन पर तीन महीने तक के कारावास और तीन लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।

विभाग का कहना है कि जांच अभियान का उद्देश्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा करना है। नियमों की अनदेखी करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।

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