रांची में दुर्गा पूजा की धूम, कहीं दक्षिण भारत के भव्य मंदिर की झलक तो कहीं आदिवासी संस्कृति का रंग, दर्शन के साथ झूलों और जायके का भी लें आनंद

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–बकरी बाजार में मौत का कुआं और ब्रेक डांस आकर्षण का केंद्र

रांची। दुर्गा पूजा का उत्साह चरम पर है। मां दुर्गा के दर्शन के लिए शहर के प्रमुख पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। भव्य सजावट, आकर्षक प्रतिमाएं और अनूठी थीम लोगों का ध्यान खींच रही हैं। कहीं दक्षिण भारत के प्रसिद्ध मंदिर की स्थापत्य शैली देखने को मिल रही है, तो कहीं वाराणसी के आध्यात्मिक वैभव और आदिवासी संस्कृति की झलक श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है।

इस बार पूजा पंडालों में दर्शन के साथ मनोरंजन और खान-पान का भी भरपूर इंतजाम है। बकरी बाजार में मौत का कुआं और ब्रेक डांस जैसे रोमांचक आकर्षण हैं, तो जिला स्कूल परिसर में 50 रुपये से झूलों का आनंद लिया जा सकता है। वहीं, रेलवे स्टेशन के बाहर सैकड़ों फास्टफूड दुकानों पर तरह-तरह के व्यंजन उपलब्ध हैं। आइए जानते हैं, रांची के प्रमुख पूजा पंडालों में क्या है खास।

बकरी बाजार : बृहदेश्वर मंदिर की भव्यता और मौत का कुआं

बकरी बाजार में भारतीय युवा संघ की ओर से तमिलनाडु के प्रसिद्ध बृहदेश्वर मंदिर की तर्ज पर भव्य पूजा पंडाल बनाया गया है। पंडाल में मां दुर्गा के साथ माता लक्ष्मी, माता सरस्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय की आकर्षक प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। मंदिर की स्थापत्य शैली और भव्य सजावट श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण बनी हुई है।

यहां धार्मिक माहौल के साथ मनोरंजन के भी कई साधन हैं। बड़े झूले, पंखे वाले झूले, ड्रैगन झूले, ब्रेक डांस और मछली वाले झूलों के अलावा मौत का कुआं लोगों को रोमांचित कर रहा है। बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए मनोरंजन के कई विकल्प मौजूद हैं।

खाने-पीने के शौकीनों के लिए भी यहां कई दुकानें सजी हैं। जूस, आइसक्रीम, पनीर अफगानी सैंडविच और किशमिश समेत कई खाद्य पदार्थों का स्वाद लिया जा सकता है। यानी बकरी बाजार में मां के दर्शन के साथ रोमांच और जायके का भी आनंद उठाया जा सकता है।

जिला स्कूल : स्वर्वेद महामंदिर की तर्ज पर बना पंडाल, 50 रुपये से झूले

रामलला दुर्गा पूजा समिति की ओर से जिला स्कूल परिसर में इस बार वाराणसी के स्वर्वेद महामंदिर की तर्ज पर पूजा पंडाल तैयार किया गया है। समिति का यह तीसरा वर्ष है और इस बार की थीम श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

पंडाल में दर्शन के बाद बच्चे और बड़े विभिन्न प्रकार के झूलों का आनंद ले सकते हैं। यहां रेलगाड़ी, नाव, कार, स्कॉर्पियो, छिपकली, डिस्को और डांसिंग फ्लावर जैसे झूले लगाए गए हैं। झूलों के टिकट की कीमत 50 से 100 रुपये तक बताई गई है।

खाने-पीने के लिए भी यहां कई स्टॉल हैं। सोया चाप 150 रुपये, गुलाब जामुन 50 रुपये, छोला कुलचा 200 रुपये, पनीर चिली के 10 पीस 200 रुपये, छोला भटूरा 150 रुपये, वेज चाउमिन 150 रुपये प्रति प्लेट और सांभर वड़ा के दो पीस 100 रुपये में उपलब्ध हैं। परिवार के साथ पूजा घूमने और स्ट्रीट फूड का स्वाद लेने वालों के लिए जिला स्कूल परिसर अच्छा विकल्प है।

कोकर : आदिवासी संस्कृति और परंपरा की झलक

कोकर दुर्गा पूजा कमेटी ने इस बार पंडाल की थीम में आदिवासी संस्कृति और परंपरा को प्रमुखता दी है। प्रवेश द्वार को आकर्षक रोशनी से सजाया गया है। पंडाल की सजावट के माध्यम से स्थानीय सांस्कृतिक पहचान को सामने लाने का प्रयास किया गया है।

यहां पांच से छह तरह के झूले लगाए गए हैं, जिनमें कार, स्कॉर्पियो और नाव वाले झूले शामिल हैं। हालांकि, पंडाल परिसर के भीतर फास्टफूड के स्टॉल नहीं लगाए गए हैं। खाने-पीने के लिए श्रद्धालुओं को सड़क किनारे सजे स्टॉलों का रुख करना होगा, जहां विभिन्न प्रकार के व्यंजन उपलब्ध हैं।

धार्मिक उत्सव के साथ आदिवासी संस्कृति और परंपरा को करीब से देखने की इच्छा रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए कोकर का पंडाल खास आकर्षण है।

रेलवे स्टेशन : वामन अवतार और केरल की संस्कृति, बाहर फास्टफूड की भरमार

रेलवे स्टेशन दुर्गा पूजा पंडाल में भगवान विष्णु के वामन अवतार की झलक प्रस्तुत की गई है। इसके साथ ही पंडाल में केरल की संस्कृति और ओणम पर्व की थीम को भी दर्शाया गया है। महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग प्रवेश द्वार बनाए गए हैं।

यहां झूलों की व्यवस्था नहीं है, लेकिन पंडाल के बाहर खाने-पीने के शौकीनों के लिए कई विकल्प मौजूद हैं। सड़क किनारे कतार में सैकड़ों फास्टफूड दुकानें सजी हैं। यहां चाय, धुस्का, चाउमिन, रोल, आइसक्रीम, छोला भटूरा, भेलपुरी, पॉपकॉर्न, मोमो और पनीर समेत कई व्यंजन मिल रहे हैं।

इन खाद्य पदार्थों की कीमतें लगभग 50 से 150 रुपये तक बताई गई हैं। ऐसे में मां के दर्शन के बाद स्ट्रीट फूड का स्वाद लेने वालों के लिए रेलवे स्टेशन के बाहर का इलाका आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

दर्शन, मनोरंजन और स्वाद का संगम

रांची के इन प्रमुख पूजा पंडालों में अलग-अलग थीम और सुविधाएं श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही हैं। बकरी बाजार रोमांचक झूलों और मौत के कुएं के लिए खास है, जिला स्कूल में 50 रुपये से झूलों का आनंद लिया जा सकता है, कोकर में आदिवासी संस्कृति की झलक मिलती है और रेलवे स्टेशन के बाहर खाने-पीने के ढेरों विकल्प हैं। श्रद्धालु अपनी पसंद के अनुसार पंडालों में दर्शन के साथ मनोरंजन और खान-पान का आनंद उठा सकते हैं।

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