—10 से 12 दिसंबर तक चलेगा राष्ट्रीय सम्मेलन, जलवायु परिवर्तन, वन्यजीव संरक्षण और सतत वन प्रबंधन समेत 12 प्रमुख विषयों पर होगी चर्चा
रांची, 16 अक्टूबर । झारखंड में पहली बार नेशनल फॉरेस्ट्री कांग्रेस 2026 का आयोजन किया जाएगा। यह राष्ट्रीय स्तर का सम्मेलन 10 से 12 दिसंबर तक आयोजित होगा। इसमें देशभर के वैज्ञानिकों, शोधार्थियों, वानिकी विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के शामिल होने की उम्मीद है। सम्मेलन का उद्देश्य वानिकी से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श करना और पर्यावरणीय चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान तलाशना है।
झारखंड के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख संजीव कुमार ने शुक्रवार को वन भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि झारखंड वन विभाग की ओर से भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई), देहरादून और इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट प्रोडक्टिविटी, लालगुटवा के सहयोग से इस सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है।
वानिकी के 12 प्रमुख विषयों पर होगा मंथन
संजीव कुमार ने कहा कि वानिकी केवल पेड़ों और जंगलों के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध जलवायु परिवर्तन, जल प्रबंधन, वन्यजीव संरक्षण और लोगों की आजीविका से भी है। इसी को ध्यान में रखते हुए सम्मेलन में 12 प्रमुख विषयों पर चर्चा की जाएगी।
इनमें जल विज्ञान, वन्यजीव संरक्षण, आजीविका, वन शासन और जलवायु परिवर्तन सहित वानिकी से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। सम्मेलन के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे शोध और विशेषज्ञों के अनुभवों को साझा कर पर्यावरण संबंधी समस्याओं के व्यावहारिक समाधान विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।
वैज्ञानिकों और शोधार्थियों को मिलेगा शोध प्रस्तुत करने का अवसर
सम्मेलन के दौरान विभिन्न विषयों पर समानांतर सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसमें उन वैज्ञानिकों और शोधार्थियों को अपने शोध प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा, जिनके शोध सार स्वीकार किए जाएंगे।
शोध प्रस्तुतियों के लिए मौखिक और पोस्टर प्रस्तुति की व्यवस्था रहेगी। इसके माध्यम से प्रतिभागी अपने शोध, निष्कर्ष और विचार विशेषज्ञों के सामने रख सकेंगे। इससे विभिन्न संस्थानों में हो रहे शोध कार्यों और उनके निष्कर्षों को साझा करने का अवसर मिलेगा।
सतत वन प्रबंधन और जलवायु संरक्षण पर जोर
प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने बताया कि नेशनल फॉरेस्ट्री कांग्रेस का मुख्य उद्देश्य वानिकी से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को एक साझा मंच पर लाकर ठोस सुझाव और समाधान विकसित करना है। जलवायु परिवर्तन और बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच सतत वन प्रबंधन को बढ़ावा देना भी सम्मेलन की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
आयोजकों को उम्मीद है कि इस राष्ट्रीय सम्मेलन से वैज्ञानिक शोध, नीतिगत विचारों और जमीनी अनुभवों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। इससे वन संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर पर्यावरण सुनिश्चित करने की दिशा में उपयोगी सुझाव सामने आ सकते हैं।






