पटना। बिहार की राजधानी पटना के बापू सभागार में शिक्षा विभाग की ओर से ‘सेवा ही संकल्प’ अभियान के तहत आयोजित राज्यस्तरीय चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिता का भव्य पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने दीप प्रज्वलित कर किया। ‘मेरे सपनों का भारत’ विषय पर आयोजित प्रतियोगिता में राज्यभर के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। आयोजकों के अनुसार, इस प्रतियोगिता में बिहार ने पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
समारोह में मुख्यमंत्री ने प्रतियोगिता के विजेता छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि आज के विद्यार्थी ही कल के नायक और महानायक हैं। उनके सपनों, विचारों और संकल्पों में ही विकसित बिहार और विकसित भारत की नींव छिपी है।
विद्यार्थियों के सपनों से बनेगा विकसित बिहार और भारत
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि विद्यार्थियों की प्रतिभा, रचनात्मकता और सकारात्मक सोच देश के भविष्य को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। चित्रकला और भाषण जैसी प्रतियोगिताएं बच्चों को अपनी कल्पनाओं और विचारों को अभिव्यक्त करने का अवसर देती हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है। बिहार के बच्चों में प्रतिभा की कमी नहीं है। उचित मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और संसाधनों के माध्यम से वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
‘विद्यार्थी साथी ऐप’ से रात में भी पढ़ाई कर रहे लाखों छात्र
मुख्यमंत्री ने डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई सुविधाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई और नीट तथा जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहायता देने के लिए ‘विद्यार्थी साथी ऐप’ उपलब्ध कराया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि इस डिजिटल माध्यम का विद्यार्थी बड़े पैमाने पर उपयोग कर रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, रात एक बजे तक लगभग 1.42 लाख विद्यार्थी इसके माध्यम से पढ़ाई करते हैं। शनिवार और रविवार को यह संख्या बढ़कर करीब पौने दो लाख तक पहुंच जाती है।
सरकार का प्रयास है कि डिजिटल माध्यमों के जरिए विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के बेहतर अवसर मिलें, ताकि वे अपनी सुविधा के अनुसार पढ़ाई कर सकें।
एक करोड़ बच्चों को जीविका दीदियों के माध्यम से मिलेगी स्कूल पोशाक
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को पोशाक उपलब्ध कराने की व्यवस्था में बदलाव की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि अब लगभग एक करोड़ बच्चों के लिए जीविका दीदियों के माध्यम से स्कूल ड्रेस सिलवाकर उपलब्ध कराने की योजना है।
इस व्यवस्था के तहत पोशाक की राशि सीधे भेजने के बजाय बच्चों को सिली हुई पोशाक उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को समय पर ड्रेस मिलने में मदद मिलेगी। साथ ही, जीविका दीदियों को पोशाक सिलाई के माध्यम से रोजगार के नए अवसर भी प्राप्त होंगे।
सरकार की इस पहल का उद्देश्य स्कूली बच्चों की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ महिलाओं की आजीविका को मजबूत करना भी है।
टीआरई-4 से करीब 33 हजार शिक्षकों की होगी बहाली
राज्य में शिक्षकों की नियुक्ति और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने बताया कि टीआरई-4 के माध्यम से करीब 33 हजार नए शिक्षकों की बहाली की जा रही है। इससे सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाने और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल देने में मदद मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों के प्रशिक्षण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में प्रशिक्षण दिलाने की योजना है, ताकि वे आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और वैश्विक शैक्षणिक अनुभवों से परिचित हो सकें।
सरकार का लक्ष्य शिक्षकों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार करना भी है, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मिल सके।
बिहार में 17 स्थानों पर केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना की पहल
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि बिहार में 17 स्थानों पर केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना के लिए जमीन उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने कहा कि इन विद्यालयों में इसी वर्ष से पढ़ाई शुरू कराने की दिशा में पहल की गई है।
केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अतिरिक्त अवसर मिलने की उम्मीद है। इससे राज्य में शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार को भी गति मिलेगी।
नालंदा और विक्रमशिला की गौरवशाली विरासत को फिर से स्थापित करने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने बिहार की ऐतिहासिक शैक्षणिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राचीन काल में नालंदा और विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालय भारत की ज्ञान और शिक्षा परंपरा की पहचान थे। बिहार की धरती ने विश्व को शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उन्होंने कहा कि सरकार इस गौरवशाली परंपरा को फिर से मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य में ऐसे उत्कृष्ट स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय विकसित करने का लक्ष्य है, जहां विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा उपलब्ध हो सके।
बिहार में उद्योग और रोजगार बढ़ाना सरकार का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने राज्य के भविष्य से जुड़े दो प्रमुख लक्ष्यों का उल्लेख किया। पहला, बिहार में उद्योगों का विस्तार कर स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करना, ताकि युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जाने की मजबूरी कम हो। दूसरा, राज्य में ही बेहतर स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय विकसित करना, जिससे विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए अन्य राज्यों पर निर्भर न रहना पड़े।
उन्होंने कहा कि शिक्षा और रोजगार के अवसरों का विस्तार बिहार के विकास के लिए महत्वपूर्ण है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा, जबकि उद्योगों के विकास से राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
आठ मेधावी छात्र-छात्राओं को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के अंत में चित्रकला और भाषण प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले राज्यभर के आठ मेधावी छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया गया। अतिथियों ने विद्यार्थियों की प्रतिभा की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य में भी मेहनत और लगन के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की संयुक्त सचिव डॉ. अमरप्रीत दुग्गल सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, विद्यार्थी और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
समारोह में विद्यार्थियों की प्रतिभा को सम्मान देने के साथ-साथ डिजिटल शिक्षा, शिक्षक नियुक्ति, स्कूल पोशाक, केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना और उच्च शिक्षा के विस्तार जैसे मुद्दों पर सरकार की प्राथमिकताओं को भी रेखांकित किया गया।






