चतरा, 21 सितंबर । वाराणसी में टीएसपीसी सुप्रीमो बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता के यूपी एटीएस के साथ मुठभेड़ में मारे जाने के बाद प्रतिबंधित नक्सली संगठन तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (TSPC) को बड़ा झटका लगा है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, बृजेश के मारे जाने के बाद 10 लाख रुपये का इनामी शशिकांत गंझू संगठन का नया सुप्रीमो बना है। संगठन में सक्रिय प्रमुख कमांडरों में शशिकांत को अहम माना जा रहा है और अब उसके सामने संगठन के बचे नेटवर्क को एकजुट रखने की चुनौती है।
लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर है शशिकांत
पलामू के मनातू थाना क्षेत्र के केदल गांव का रहने वाला शशिकांत गंझू लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर है। झारखंड सरकार ने उस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा है। वह एनआईए के मामलों में भी वांटेड बताया जाता है।
पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पलामू, गढ़वा, लातेहार, चतरा और हजारीबाग समेत झारखंड के कई इलाकों के अलावा उत्तर प्रदेश में भी उसके खिलाफ 50 से अधिक मामले दर्ज हैं।
2000 के दशक में शुरू हुआ नक्सली सफर
शशिकांत गंझू की नक्सली गतिविधियों की शुरुआत 2000 के दशक में होने की जानकारी पुलिस रिकॉर्ड में सामने आई है। वह पहले माओवादियों के ओए सदस्य के रूप में सक्रिय था। बाद में बृजेश गंझू के संपर्क में आने के बाद वह टीएसपीसी से जुड़ गया।
पलामू और चतरा का क्षेत्र उसकी गतिविधियों का प्रमुख इलाका रहा है। पुलिस के अनुसार, वह अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल करता है और उसके पास एके-47 होने की जानकारी भी सामने आती रही है।
करीब 13 मुठभेड़ों में बच निकलने का दावा
पुलिस के अनुसार, वर्ष 2010 के बाद से शशिकांत करीब 13 मुठभेड़ों में सुरक्षा बलों के हाथों से बच निकलने में सफल रहा है। सितंबर 2025 में पलामू के मनातू थाना क्षेत्र के केदल में पुलिस और टीएसपीसी उग्रवादियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इस दौरान शशिकांत के बच निकलने की बात सामने आई थी, जबकि पुलिस के दो जवान शहीद हो गए थे।
इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों की नजर शशिकांत पर और तेज हो गई थी।
बृजेश के बाद संगठन को एकजुट करने की चुनौती
बृजेश गंझू के मारे जाने के बाद टीएसपीसी के प्रमुख कमांडरों में शशिकांत को सबसे सक्रिय चेहरों में माना जा रहा है। संगठन के कई अन्य कमांडर या तो जेल में हैं या सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं।
हाल में जेल से बाहर आया नथुनी सिंह भी शशिकांत के साथ जुड़ा बताया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि शशिकांत संगठन के बचे हुए कैडर और नेटवर्क को फिर से एकजुट करने की कोशिश कर सकता है।
अंधविश्वास से जुड़े होने की भी पुलिस को जानकारी
झारखंड पुलिस की जांच में शशिकांत के अंधविश्वास से जुड़े होने की जानकारी भी सामने आने की बात कही गई है। पुलिस के अनुसार, किसी बड़ी घटना के बाद उसके द्वारा कथित तौर पर बलि दिए जाने की जानकारी मिली थी।
पलामू का केदल इलाका लंबे समय तक शशिकांत का सुरक्षित ठिकाना माना जाता रहा है।
झारखंड से उत्तर प्रदेश तक रहा नेटवर्क
टीएसपीसी के कमांडरों की गतिविधियां झारखंड तक सीमित नहीं रही हैं। वर्ष 2025 में पलामू में सुरक्षा बलों से बच निकला टीएसपीसी कमांडर नगीना बाद में उत्तर प्रदेश के वाराणसी क्षेत्र में पकड़ा गया था। इसके बाद झारखंड पुलिस ने उससे पूछताछ की थी।
पूछताछ के दौरान शशिकांत और नगीना के उत्तर प्रदेश में प्रवेश से जुड़ी जानकारी सामने आने की बात कही गई थी। इसी दौरान यूपी एटीएस की कार्रवाई में नगीना पकड़ा गया, जबकि शशिकांत वहां से निकलने में सफल रहा था।
बृजेश के बाद शशिकांत पर एजेंसियों की नजर
इसके बाद से उत्तर प्रदेश पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां टीएसपीसी से जुड़े लोगों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थीं। इसी बीच वाराणसी में यूपी एटीएस की कार्रवाई में टीएसपीसी सुप्रीमो बृजेश गंझू मारा गया।
बृजेश गंझू के मारे जाने के बाद अब झारखंड पुलिस के साथ एनआईए और अन्य केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों की नजर शशिकांत गंझू पर है। एजेंसियां उसके संभावित संपर्कों और संगठन के बचे नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटा रही हैं।
सुरक्षा एजेंसियों के सामने अब चुनौती टीएसपीसी के बचे नेटवर्क को खंगालने के साथ-साथ शशिकांत गंझू तक पहुंचने की भी है।






