भागलपुर, 13 सितंबर। भागलपुर का निचला और दियारा इलाका इन दिनों बाढ़ की चपेट में है। कई इलाके टापू में तब्दील हो गए हैं और आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। इसके बावजूद भारतीय सेना में भर्ती होने का सपना देख रहे स्थानीय युवाओं के हौसले नहीं डिगे हैं। जिस मैदान में कभी ये युवा सुबह-शाम दौड़ लगाकर पसीना बहाते थे, आज वह चार से पांच फीट तक बाढ़ के पानी में डूबा हुआ है। लेकिन युवाओं ने अभ्यास बंद करने के बजाय इसी पानी के बीच अपनी शारीरिक तैयारी जारी रखी है।
जलमग्न मैदान में जारी है फिजिकल ट्रेनिंग
बाढ़ के पानी से पूरी तरह डूबे मैदान में युवा रोजाना अपनी शारीरिक क्षमता बढ़ाने के लिए अभ्यास कर रहे हैं। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उनका लक्ष्य स्पष्ट है—सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना।
युवाओं का कहना है कि आने वाले दिनों में सेना की भर्ती परीक्षा होने वाली है। ऐसे में यदि उन्होंने अभी तैयारी रोक दी तो उनके करियर और सेना में जाने के सपने पर असर पड़ सकता है।
पैरा कमांडो प्रशिक्षक ने नहीं रुकने दिया अभ्यास
इन युवाओं के हौसले को मजबूत कर रहे हैं पैरा कमांडो से सेवानिवृत्त रणजीत सोलंकी। मैदान में पानी भर जाने के बाद भी उन्होंने युवाओं का अभ्यास बंद नहीं होने दिया।
रणजीत सोलंकी खुद बाढ़ के पानी में उतरकर युवाओं को प्रशिक्षण दे रहे हैं। वे उन्हें कठिन और विपरीत परिस्थितियों में फिटनेस बनाए रखने के साथ-साथ आपदा जैसी परिस्थितियों का सामना करने के लिए भी तैयार कर रहे हैं।
‘देश सेवा का सपना है, हर मुश्किल का सामना करेंगे’
अभ्यास में जुटे युवाओं का कहना है कि सेना में जाना और देश की सेवा करना उनका सपना है। उन्होंने कहा, “देश सेवा और सेना में जाने का हमारा सपना है। इस सपने को पूरा करने के लिए हम हर मुश्किल का सामना करने को तैयार हैं।”
युवाओं के मुताबिक, मैदान में पानी भर जाने से अभ्यास के लिए मुश्किलें जरूर बढ़ी हैं, लेकिन उनका जुनून कम नहीं हुआ है।
बाढ़ ने मैदान छीना, हौसला नहीं
भागलपुर में बाढ़ की विकट परिस्थितियों के बीच युवाओं का यह जज्बा लोगों के लिए प्रेरणा बन रहा है। चार से पांच फीट पानी के बीच शारीरिक प्रशिक्षण और सेवानिवृत्त पैरा कमांडो प्रशिक्षक की मेहनत यह संदेश दे रही है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, मजबूत इरादों के सामने उन्हें मात दी जा सकती है।
बाढ़ ने इन युवाओं से उनका अभ्यास का मैदान जरूर छीन लिया है, लेकिन सेना में भर्ती होकर देश सेवा करने का उनका सपना और फौलादी हौसला नहीं छीन सकी है।






