रांची, 12 सितंबर। रांची के रिंग रोड स्थित ट्यूलिप हॉस्पिटल के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। 10 सितंबर को अस्पताल में मरीज के परिजनों के साथ हुई मारपीट और कथित दुर्व्यवहार की घटना को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के निर्देश पर रांची के सिविल सर्जन ने अस्पताल का पंजीकरण/लाइसेंस तत्काल प्रभाव से अंतरिम रूप से निलंबित कर दिया है। यह निलंबन विस्तृत जांच पूरी होने और सक्षम प्राधिकारी के अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा।
नए मरीजों की भर्ती और नई सेवाओं पर रोक
निलंबन आदेश के तहत ट्यूलिप हॉस्पिटल में नए ओपीडी मरीजों का पंजीकरण और इलाज, नए आईपीडी मरीजों की भर्ती, नई वैकल्पिक सर्जरी और अन्य नई चिकित्सकीय सेवाओं पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।
हालांकि, अस्पताल में पहले से भर्ती मरीजों के इलाज में किसी तरह की बाधा नहीं आएगी। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल प्रबंधन को उन्हें आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। आवश्यकता पड़ने पर भर्ती मरीजों को सुरक्षित तरीके से दूसरे अस्पताल में स्थानांतरित करने की व्यवस्था भी प्रबंधन को करनी होगी।
केस शीट और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश
स्वास्थ्य विभाग ने घटना की विस्तृत जांच के लिए अस्पताल प्रबंधन को सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। इनमें मरीजों की केस शीट, ओपीडी और आईपीडी रजिस्टर, उपचार से जुड़े दस्तावेज, ड्यूटी रोस्टर और सीसीटीवी फुटेज सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड शामिल हैं।
इन्हीं दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर 10 सितंबर को हुई घटना की विस्तृत जांच की जाएगी।
‘अस्पताल इलाज के लिए हैं, दबंगई के लिए नहीं’
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि अस्पताल मरीजों के इलाज और उनकी सेवा के लिए होते हैं, दबंगई या दुर्व्यवहार के लिए नहीं। मरीजों और उनके परिजनों के साथ किसी भी तरह का अमानवीय व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि बकाया राशि के नाम पर किसी मृत मरीज का शव रोकना या उसके परिजनों को प्रताड़ित करना गंभीर मामला है। ऐसी स्थिति में संबंधित अस्पताल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

जांच पूरी होने तक जारी रहेगा निलंबन
स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई के बाद ट्यूलिप हॉस्पिटल में नए मरीजों की भर्ती और नई चिकित्सा सेवाओं पर रोक जारी रहेगी। पहले से भर्ती मरीजों को आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी अस्पताल प्रबंधन की होगी।
मामले की विस्तृत जांच पूरी होने के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर अस्पताल के खिलाफ आगे की कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा।






