पटना, 05 सितंबर । बिहार में नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच पटना जिले में बाढ़ का असर लगातार बढ़ रहा है। धनरूआ प्रखंड में दरधा नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। तेज बहाव के कारण देवधा-इमलिया-मठिया ग्रामीण सड़क का करीब 200 फीट हिस्सा बह गया, जिससे देवधा, इमलिया और मठिया गांवों का प्रखंड मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। वीर-कुशवन मार्ग पर भी दरधा नदी का पानी चढ़ जाने से आवागमन ठप हो गया है।
दरधा नदी ने दिखाया रौद्र रूप, ग्रामीणों में दहशत
बाढ़ नियंत्रण विभाग, पटना के सहायक अभियंता धर्मेंद्र कुमार के अनुसार, दरधा नदी का जलस्तर अब तक के सर्वाधिक 56.12 मीटर तक पहुंच गया है। ऐसी स्थिति में कहीं भी नदी का पानी तटबंध तोड़ने या ओवरफ्लो होने का खतरा बना हुआ है। स्थिति से निपटने के लिए विभाग की पूरी मशीनरी को अलर्ट पर रखा गया है।
लगातार बढ़ते जलस्तर से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। धनरूआ प्रखंड की करीब चार पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हुई हैं। हालांकि, अभी तक घरों में पानी नहीं पहुंचा है। कई स्थानों पर तटबंध टूटने और सड़कों के क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
25 गांवों की करीब दो हजार बीघे धान की फसल डूबी
लोकाइन और महातमाइन नदी के तटबंध टूटने से करीब 25 गांवों की दो हजार बीघे में लगी धान की फसल बाढ़ के पानी में डूब गई है। खेत पूरी तरह जलमग्न होने से किसानों को भारी नुकसान की आशंका है और फसलें बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई हैं।
वीर पंचायत के हादसापुर और इमलिया, सांडा पंचायत के सीताचक और चनाकी, देवधा पंचायत के देवधा, भखरी और मुस्तफापुर तथा धनरूआ पंचायत के नदपुरा और अलीपुर गांव बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं।
प्रभावित इलाकों में युद्धस्तर पर राहत और कटावरोधी कार्य
एसडीएम धनराज कुमार ने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों का लगातार दौरा किया जा रहा है। जहां से भी सूचना मिल रही है, वहां युद्धस्तर पर कटावरोधी कार्य कराया जा रहा है।
उन्होंने कहा, “धनरूआ प्रखंड में करीब तीन-चार पंचायतें बाढ़ प्रभावित हुई हैं। ज्यादातर खेत जलमग्न हो गए हैं। गांवों का संपर्क टूटा है और सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। जो तटबंध टूटा था, उसकी मरम्मत कर दी गई है।”
पुनपुन नदी का बढ़ा जलस्तर, रेल परिचालन प्रभावित
इधर, पुनपुन नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से रेल परिचालन पर भी असर पड़ा है। शुक्रवार रात करीब आठ बजे पुनपुन घाट स्थित रेल पुल संख्या-21 के डाउन लाइन ट्रैक तक बाढ़ का पानी पहुंच गया। इसके बाद सुरक्षा के मद्देनजर डाउन लाइन पर ट्रेनों का परिचालन अगले आदेश तक रोक दिया गया।
पुनपुन के स्टेशन प्रबंधक संजय गोयल ने बताया, “पानी ट्रैक पर आते ही सुरक्षा के मद्देनजर डाउन लाइन पर ट्रेनों का परिचालन अगले आदेश तक रोक दिया गया है। भारी दबाव के कारण ट्रेन परिचालन बंद किया गया है। डाउन लाइन पर परिचालन चार सितंबर की रात 8:10 बजे से अगले आदेश तक निलंबित रहेगा।”
अप लाइन से चल रही ट्रेनें, चार मेमू रद्द
फिलहाल अप लाइन से ट्रेनों का परिचालन किया जा रहा है। इसके तहत 22350 वंदे भारत एक्सप्रेस, 2346 जनशताब्दी एक्सप्रेस और 63258 डाउन पैसेंजर सहित कई ट्रेनों को पुनपुन घाट से परसा बाजार तक अप लाइन से गुजारा गया।

स्टेशन प्रबंधक के अनुसार, पुनपुन नदी का जलस्तर अभी और बढ़ रहा है। यदि जलस्तर अगले 30 से 40 सेंटीमीटर और बढ़ता है तो सुरक्षा के लिहाज से अप लाइन का परिचालन भी बंद करना पड़ सकता है। रेलवे स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है।
रेलवे ने पांच सितंबर को चलने वाली चार मेमू ट्रेनों को रद्द कर दिया है। इनमें 63242, 63244, 63245 और 63247 गया-पटना/पटना-गया मेमू शामिल हैं।
1976 के बाद पुनपुन में सबसे गंभीर स्थिति
बाढ़ नियंत्रण विभाग के अनुसार, पुनपुन नदी का जलस्तर 53.28 मीटर रिकॉर्ड किया गया है। विभाग के सहायक अभियंता धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिसके मद्देनजर आसपास के इलाकों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
पटना जिला प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में क्षतिग्रस्त तटबंधों और टूटी सड़कों की मरम्मत का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है। जल संसाधन विभाग की टीमें लगातार प्रभावित इलाकों की निगरानी कर रही हैं। कटाव वाले स्थानों पर बोरियों और जेसीबी की मदद से मरम्मत कार्य कराया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि 1976 के बाद पुनपुन नदी इस समय अपने सबसे उग्र रूप में है। गंगा और पुनपुन के बाद अब दरधा नदी के भी उफान पर होने से पटना जिले के कई इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।






