पटना। बिहार के वरिष्ठ कवि एवं गीतकार सत्यनारायण का 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने 27 अगस्त की देर रात कदमकुआं स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से साहित्य और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर है। सत्यनारायण बिहार गीत ‘मेरे भारत के कंठहार’ के रचयिता थे, जिसने बिहार की सांस्कृतिक पहचान को नई आवाज दी।
वर्ष 2012 में बिहार के शताब्दी वर्ष के अवसर पर रचा गया यह गीत आज भी बिहार की पहचान और गौरव से जुड़ा हुआ है। सत्यनारायण ने नालंदा खुला विश्वविद्यालय के कुलगीत की भी रचना की थी। उनके गीतों और कविताओं में सामाजिक सरोकार, जनभावना और मानवीय संवेदनाओं की स्पष्ट झलक मिलती थी।
वर्ष 1974 के जेपी आंदोलन के दौरान नुक्कड़ कविता पाठ के जरिए उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। लंबे साहित्यिक जीवन में उन्होंने गीत, नवगीत और कविता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके निधन पर साहित्यकारों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे हिंदी साहित्य की अपूरणीय क्षति बताया।
सत्यनारायण को उनके साहित्यिक योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मान मिले। बिहार सरकार ने उन्हें नागार्जुन सम्मान (2020-21) से सम्मानित किया था। वहीं भारत सरकार की ओर से उन्हें भारतेन्दु हरिश्चन्द्र पुरस्कार (2023) प्रदान किया गया।
13 सितंबर 1935 को भोजपुर जिले के कौलोडिहरी गांव में जन्मे सत्यनारायण जीवनभर साहित्य साधना में सक्रिय रहे। उनकी प्रमुख कृतियों में ‘तुम ना नहीं कर सकते’, ‘टूटते जल बिम्ब’, ‘सुनें प्रजाजन’ और ‘स्मृतियों में’ शामिल हैं।
उनके निधन से बिहार ने ऐसी साहित्यिक आवाज खो दी है, जिसने कविता और गीत के माध्यम से कई दशकों तक समाज और समय की संवेदनाओं को स्वर दिया।





