रांची, 16 अगस्त। झारखंड में चल रहे जेपीएससी-जेएसएससी छात्र आंदोलन को लेकर छात्र अभ्यर्थी पीयूष कुमार ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि यदि दिशोम गुरु शिबू सोरेन आज होते तो संभवतः छात्रों के आंदोलन और उनकी मांगों को लेकर सरकार का रवैया अलग होता। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन छात्रों के आंदोलन से दूरी बनाए हुए हैं।
‘गुरुजी होते तो छात्रों के बीच पहुंचते’
रविवार को जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में बातचीत के दौरान पीयूष कुमार ने कहा कि शिबू सोरेन केवल हेमंत सोरेन के पिता ही नहीं, बल्कि झारखंड के लोगों के बीच गुरुजी और अभिभावक के रूप में सम्मानित रहे हैं।
उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन की राजनीतिक शैली आंदोलनों और जनता के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनने की रही है। यदि आज गुरुजी मौजूद होते तो संभवतः आंदोलन स्थल पर पहुंचकर छात्रों से बातचीत करते और उनकी मांगों पर सरकार के स्तर से कार्रवाई के लिए दबाव बनाते।
‘प्रमुख मांगों पर अब तक ठोस निर्णय नहीं’
पीयूष कुमार ने कहा कि लंबे समय से आंदोलन जारी रहने के बावजूद छात्रों की प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इसके कारण अभ्यर्थियों ने आंदोलन को और आगे बढ़ाने का फैसला किया है।
उन्होंने बताया कि 16 अगस्त को पुतला दहन और 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास के घेराव का निर्णय लिया गया है।
अनशनकारी छात्रों की हालत पर जताई चिंता
छात्र नेता ने कहा कि आंदोलन में शामिल अनशनकारी छात्रों की हालत लगातार बिगड़ रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि अनशन के दौरान किसी छात्र की तबीयत गंभीर होती है या कोई अप्रिय घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।
उन्होंने कहा कि छात्रों के सामने अब आंदोलन जारी रखने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है।
‘98 फीसदी मांगें मानने के दावे पर सवाल’
पीयूष कुमार ने सरकार की ओर से छात्रों की 98 प्रतिशत मांगें मान लिए जाने के दावे पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब तक परीक्षाओं को रद्द करने समेत छात्रों की प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक सरकार और छात्रों के बीच बातचीत किस आधार पर आगे बढ़ेगी।
उन्होंने टीडीपीएल एजेंसी के माध्यम से आयोजित सीजीएल, पीजीटी समेत विभिन्न परीक्षाओं को लेकर भी छात्रों की आपत्तियां सामने रखीं। एजेंसी के चयन की प्रक्रिया में पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि केवल परीक्षा कैलेंडर जारी करने से छात्रों की समस्याओं का समाधान नहीं होगा।
‘आश्वासन से नहीं, ठोस कार्रवाई से खत्म होगा आंदोलन’
पीयूष कुमार ने कहा कि छात्रों को केवल आश्वासन देकर आंदोलन समाप्त कराने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए। सरकार को विवादित परीक्षाओं और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों के बीच मौजूद संदेह दूर करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
उन्होंने राज्य सरकार से छात्र हित में राजनीति से ऊपर उठकर निर्णय लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगें उनके भविष्य और रोजगार से जुड़ी हैं, इसलिए सरकार को संवेदनशीलता के साथ मामले का समाधान निकालना चाहिए।
पीयूष कुमार ने कहा कि आंदोलन को किसी भी राजनीतिक या सामाजिक मंच से मिलने वाले नैतिक समर्थन का छात्र स्वागत करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा।






