RIMS घोटाला: CID रेड के 26 दिन बाद भी FIR नहीं, फर्जी नामांकन, दवा खरीद और टेंडर में गड़बड़ी की जांच का दायरा बढ़ा

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रांची। राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) में CID की छापेमारी के 26 दिन बीत जाने के बावजूद अब तक किसी भी मामले में FIR दर्ज नहीं की गई है। जांच एजेंसी फिलहाल दस्तावेजों और साक्ष्यों की गहन जांच में जुटी है। इस बीच कई गंभीर अनियमितताओं के संकेत सामने आए हैं।

जांच का दायरा बढ़ा

राज्य सरकार को RIMS में टेंडर प्रक्रिया और MBBS नामांकन में गड़बड़ी की शिकायतें मिली थीं, जिसके बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जांच के आदेश दिए। CID की जांच में अब तक कई स्तर पर अनियमितताएं सामने आई हैं।

20 से अधिक नामांकन जांच के घेरे में

सूत्रों के अनुसार—

  • MBBS और BDS के 20+ नामांकन जांच के दायरे में
  • फर्जी जाति और दिव्यांगता प्रमाण पत्र के इस्तेमाल का आरोप
  • 4 छात्रों के मामलों में विस्तृत जानकारी मांगी गई

जांच के दौरान छात्रों के प्रमाण पत्र जिलों में सत्यापन के लिए भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद फर्जी पाए जाने पर FIR दर्ज की जाएगी।
दो छात्रों का नामांकन पहले ही रद्द किया जा चुका है।

दवा और टेंडर घोटाले की भी जांच

CID जांच में सामने आया—

  • अस्पताल के स्टॉक में सड़ी हुई दवाइयां मिलीं
  • दवा और उपकरण खरीद के दस्तावेज जब्त
  • सैनिटेशन, हाउसकीपिंग और बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट टेंडर जांच के घेरे में

आरोप है कि तकनीकी और वित्तीय मानकों पर अयोग्य होने के बावजूद उत्तर प्रदेश की तीन कंपनियों को टेंडर में पात्र घोषित किया गया।

पूर्व निदेशक से होगी पूछताछ

यह टेंडर तत्कालीन निदेशक डॉ. राजकुमार के कार्यकाल में हुआ था। CID उनसे भी पूछताछ की तैयारी में है।

FIR में देरी क्यों?

26 दिन बाद भी FIR दर्ज नहीं होने की वजह—

  • दस्तावेजों का सत्यापन जारी
  • जिलों से रिपोर्ट का इंतजार
  • जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय की जा रही

आगे क्या?

जांच पूरी होने के बाद—

  • दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज होगी
  • कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी
  • प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई संभव

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