मोतिहारी वाटर पार्क विवाद: RJD सांसद सुधाकर सिंह पर FIR, हत्या के प्रयास और पॉकेटमारी के आरोप

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मोतिहारी — बिहार के मोतिहारी में प्रस्तावित वाटर पार्क परियोजना को लेकर चल रहा विवाद अब राजनीतिक और कानूनी टकराव में बदल गया है। पिपराकोठी थाना में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह समेत कई लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है।

सरकारी जमीन बनाम किसानों का दावा
पूरा मामला पिपराकोठी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के पास की गैरमजरूआ सरकारी जमीन से जुड़ा है। प्रशासन के अनुसार करीब 14 एकड़ जमीन में से 3 एकड़ पर केंद्र सरकार की वाटर पार्क परियोजना प्रस्तावित है।
वहीं स्थानीय किसानों का दावा है कि वे वर्षों से इस जमीन पर खेती करते आ रहे हैं और बिना उचित प्रक्रिया उन्हें बेदखल नहीं किया जा सकता।

आंदोलन में सांसद की एंट्री, विवाद बढ़ा
3 जुलाई को आंदोलन ने नया मोड़ लिया, जब सांसद सुधाकर सिंह धरना स्थल पहुंचे और किसानों के समर्थन में सभा को संबोधित किया। इसके बाद वे किसानों के साथ विवादित स्थल तक गए और ट्रैक्टर पर बैठकर जमीन की जुताई करते नजर आए।

गंभीर धाराओं में केस दर्ज
इस घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सांसद और अन्य लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास, पॉकेटमारी और सरकारी कार्य में बाधा डालने जैसे आरोपों में FIR दर्ज की है।

निर्माण एजेंसी का आरोप
यह प्राथमिकी निर्माण कार्य कर रही निजी एजेंसी की शिकायत पर दर्ज हुई है। एजेंसी का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने काम रुकवाने के लिए मजदूरों और कर्मचारियों के साथ मारपीट की।
शिकायत के मुताबिक, भीड़ ने जेसीबी चालक और खलासी को पीटकर घायल कर दिया और कर्मचारियों के मोबाइल, औजार और नकदी भी छीन ली।

समर्थकों ने बताया राजनीतिक साजिश
सांसद के समर्थकों और किसान संगठनों ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक द्वेष करार दिया है। उनका कहना है कि किसानों की आवाज उठाने के कारण सांसद को निशाना बनाया जा रहा है।

लोकसभा स्पीकर से मुलाकात की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, सांसद सुधाकर सिंह 7 जुलाई को नई दिल्ली में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर सकते हैं, जहां वे इस मामले और जनप्रतिनिधियों के अधिकारों का मुद्दा उठा सकते हैं।

प्रशासन सख्त, किसान भी अड़े
जिला प्रशासन का कहना है कि जमीन पूरी तरह सरकारी है और परियोजना जनहित में है, इसलिए इसे हर हाल में पूरा किया जाएगा।
वहीं किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, आंदोलन जारी रहेगा और जरूरत पड़ने पर इसे और तेज किया जाएगा।

टकराव पर टिकी नजरें
फिलहाल पिपराकोठी में प्रशासन और किसानों के बीच तनाव बना हुआ है। एक तरफ विकास परियोजना को आगे बढ़ाने की तैयारी है, तो दूसरी ओर किसान अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। आने वाले दिनों में इस विवाद का रुख क्या होगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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