औरंगाबाद, बुधवार — बिहार के औरंगाबाद जिले में एक बड़ा हादसा सामने आया है, जहां बच्चों से भरी एक स्कूली वैन करीब 15 फीट नीचे नहर में गिर गई। इस दुर्घटना में वैन में सवार 13 बच्चे घायल हो गए। घटना कुटुंबा थाना क्षेत्र के अंबा-नवीनगर मुख्य मार्ग पर तामसी मोड़ के पास हुई।
सुबह स्कूल जाते वक्त हुआ हादसा
बताया जा रहा है कि बुधवार सुबह संत जेवियर हाई स्कूल, अंबा की वैन बच्चों को लेकर स्कूल जा रही थी। वैन में कुटुंबा, लखना, महुआ धाम और मीरपुर गांव के बच्चे सवार थे। इसी दौरान वाहन अनियंत्रित होकर नहर में जा गिरा। हादसे के बाद चालक मौके से फरार हो गया।
ग्रामीणों ने तोड़कर निकाले बच्चे
घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए पहुंचे और वैन के शीशे तोड़कर बच्चों को बाहर निकाला। सभी घायलों को इलाज के लिए कुटुंबा रेफरल अस्पताल पहुंचाया गया। हादसे में वैन का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
तीन बच्चों की हालत गंभीर
घटना में घायल तीन बच्चों — 5 वर्षीय आरवी प्रताप, 12 वर्षीय हर्ष कुमार और 7 वर्षीय मौली कुमारी — की हालत गंभीर होने पर उन्हें औरंगाबाद सदर अस्पताल रेफर किया गया। अन्य घायलों में साक्षी कुमारी, आदित्य राज, अमी कुमारी, लकी राज, सुगंध आर्यन, सृष्टि कुमारी, आयुष, अक्षय, वैभव, आबिद और अमित शामिल हैं।
ओवरलोडिंग और तेज रफ्तार बनी वजह
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वैन में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाया गया था। वहीं वाहन की रफ्तार भी तेज थी, जिसके कारण चालक नियंत्रण खो बैठा और वैन रेलिंग पार कर नहर में गिर गई।
अस्पताल पहुंचे जनप्रतिनिधि और शिक्षक
हादसे की सूचना मिलते ही पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह और स्कूल के शिक्षक अस्पताल पहुंचे। विद्यालय प्रबंधन के राहुल कुमार ने बताया कि सभी बच्चों की स्थिति अब खतरे से बाहर है। चालक ने फोन पर दावा किया कि सामने से आए दूसरे वाहन के कारण वैन का संतुलन बिगड़ा।

चालक की तलाश में पुलिस
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। कुटुंबा थानाध्यक्ष इमरान आलम ने बताया कि दुर्घटनाग्रस्त वाहन को जब्त कर लिया गया है और फरार चालक की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।
स्कूल प्रबंधन और परिवहन विभाग पर सवाल
हादसे के बाद अभिभावकों में भारी आक्रोश है। उनका आरोप है कि स्कूल प्रबंधन जर्जर वाहनों का इस्तेमाल करता है और क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाया जाता है। साथ ही परिवहन विभाग की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।






