पटना। बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण को लेकर शुक्रवार को लोक भवन में राज्यपाल-सह-कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में उच्च शिक्षा सुधार, शोध को बढ़ावा, डिजिटल प्रशासन और शिक्षकों के स्थानांतरण से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
शिक्षकों और कर्मचारियों के तबादले के लिए तय होगी समय-सीमा
बैठक में प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए शिक्षकों एवं कर्मचारियों के स्थानांतरण और शिक्षकों की पदोन्नति के लिए समय-सीमा तय करने पर सहमति बनी। निर्णय लिया गया कि सामान्य स्थानांतरण केवल जून माह में किए जाएंगे। इसके अलावा किसी भी अन्य समय में स्थानांतरण केवल अत्यावश्यक स्थिति में और कुलाधिपति की पूर्व स्वीकृति से ही संभव होगा।
30 सितंबर तक लंबित डिग्रियां जारी करने का निर्देश
बैठक में विश्वविद्यालयों में लंबित डिग्रियों के निष्पादन की समीक्षा की गई। राज्यपाल ने निर्देश दिया कि 30 सितंबर 2026 तक सभी लंबित डिग्रियों का वितरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को समय पर प्रमाणपत्र उपलब्ध हो सकें।
31 दिसंबर तक सभी विश्वविद्यालयों में लागू होगा समर्थ पोर्टल
बैठक में बताया गया कि राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में नामांकन की प्रक्रिया समर्थ पोर्टल के माध्यम से संचालित की जा रही है। राज्यपाल ने निर्देश दिया कि 31 दिसंबर 2026 तक सभी विश्वविद्यालयों में समर्थ पोर्टल के सभी 26 मॉड्यूल, जिनमें लेखा एवं वित्त, कर्मचारी सेवाएं और अकादमिक पैकेज शामिल हैं, पूरी तरह लागू किए जाएं।
शोध को बढ़ावा देने के लिए तीन नई योजनाओं पर सहमति
शोध एवं अनुसंधान को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से कुलाधिपति पोस्ट-डॉक्टोरल फेलोशिप, मुख्यमंत्री शोध अनुदान योजना और मुख्यमंत्री शोध छात्रवृत्ति योजना के प्रस्ताव पर सहमति बनी। इन योजनाओं का उद्देश्य राज्य में गुणवत्तापूर्ण शोध को बढ़ावा देना और शोधार्थियों को आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराना है।
211 नए सरकारी डिग्री कॉलेजों में होगी केंद्रीयकृत नियुक्ति
बैठक में जानकारी दी गई कि नवसृजित 211 राजकीय डिग्री महाविद्यालयों में संविदा आधारित सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति केंद्रीयकृत प्रक्रिया के माध्यम से की जाएगी। इसके लिए ऐसी चयन प्रक्रिया तैयार की गई है, जिससे योग्य और सक्षम शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित हो सके।
पटना और मुजफ्फरपुर में शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र होंगे सशक्त
फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम को प्रभावी बनाने के लिए प्रत्येक उच्च शिक्षण संस्थान में प्रतिवर्ष कम-से-कम एक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना अनिवार्य होगा। इसके लिए पटना और मुजफ्फरपुर विश्वविद्यालय स्थित मदन मोहन मालवीय शिक्षक प्रशिक्षण केंद्रों को और अधिक सक्रिय एवं सशक्त बनाया जाएगा।
नई शिक्षा नीति के अनुरूप होंगे पाठ्यक्रम
बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा की गई। बताया गया कि सभी शैक्षणिक कार्यक्रमों को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है तथा स्नातकोत्तर के 43 विषयों के नए पाठ्यक्रमों को जुलाई के पहले सप्ताह तक मंजूरी दिए जाने का लक्ष्य रखा गया है।
बिहार के विश्वविद्यालयों के लिए बनेगा नया अधिनियम
उच्च शिक्षा के नियामकीय ढांचे को अधिक सरल, पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए 15 राज्यों और केंद्रीय विश्वविद्यालयों के अधिनियमों का अध्ययन कर नया प्रस्ताव तैयार किया गया है। बैठक में सहमति बनी कि बिहार के विश्वविद्यालयों के लिए नया अधिनियम बनाया जाएगा, जो अन्य राज्यों और केंद्रीय विश्वविद्यालयों की श्रेष्ठ व्यवस्थाओं पर आधारित होगा।
शोधार्थियों के लिए बनेगा कुलाधिपति पुस्तकालय
बैठक में शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए एक समर्पित कुलाधिपति पुस्तकालय स्थापित करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। इस पुस्तकालय के माध्यम से शोधकर्ताओं को उच्च गुणवत्ता वाले शोध संसाधनों और डिजिटल सुविधाओं तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने राज्यपाल की पहल की सराहना
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उच्च शिक्षा में दीर्घकालिक सुधार के लिए राज्यपाल द्वारा की जा रही पहलों की सराहना की और कहा कि इन निर्णयों से बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी, आधुनिक और छात्र-केंद्रित बनेगी। बैठक में राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, सचिव लोकेश कुमार सिंह, उच्च शिक्षा निदेशक प्रो. एन.के. अग्रवाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।






