पश्चिम एशिया संघर्ष विराम पर शशि थरूर ने शांति को बताया जरूरी, कांग्रेस ने नीति संशोधन की मांग की

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नई दिल्ली, 11 अप्रैल । पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्ष विराम के बीच कांग्रेस नेता शशि थरूर ने शांति को सबसे अहम बताया है। उन्होंने कहा कि शांति कौन स्थापित करता है, यह महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि शांति का स्थापित होना जरूरी है।

शांति भारत के हित में: थरूर

शशि थरूर ने कहा कि भारत का मूल हित शांति और क्षेत्रीय स्थिरता में है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि शांति प्रक्रिया विफल होती है तो उसके कारणों का गंभीरता से विश्लेषण किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकें। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को हालात पर सतर्क नजर रखते हुए सक्रिय रूप से जुड़ना चाहिए।

सक्रिय भूमिका निभाने की जरूरत

थरूर ने कहा कि भारत को अलग-थलग रहने के बजाय वैश्विक और क्षेत्रीय मामलों में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि “पड़ोस में आग लगी हो तो हम केवल दर्शक नहीं बन सकते।” हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत की भूमिका सोच-समझकर तय की जानी चाहिए और कभी-कभी मौन भी प्रभावी योगदान हो सकता है।

सरकार के प्रयासों का किया जिक्र

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री और पेट्रोलियम मंत्री क्षेत्र के नेताओं के संपर्क में हैं, जो एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि इस तरह का जुड़ाव भारत को भविष्य में बड़ी भूमिका निभाने के लिए सक्षम बनाता है।

कांग्रेस ने प्रस्ताव में उठाए सवाल

उल्लेखनीय है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अपने प्रस्ताव में सरकार से विदेश नीति में संशोधन की मांग की है। प्रस्ताव में कहा गया है कि राज्याध्यक्षों की हत्या, अंतरराष्ट्रीय कानून से बाहर युद्ध और नागरिकों पर हमले जैसे कदम मानवता और वैश्विक नियम-आधारित व्यवस्था के खिलाफ हैं।

अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों पर जोर

कांग्रेस ने कहा कि किसी भी समाधान को अंतरराष्ट्रीय कानून और सिद्धांतों—जैसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर, जिनेवा कन्वेंशन्स और अन्य वैश्विक समझौतों—पर आधारित होना चाहिए। विशेष रूप से क्षेत्रीय अखंडता और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया गया।

सरकार से एकजुट राष्ट्रीय दृष्टिकोण की मांग

कांग्रेस ने अपने प्रस्ताव में कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए केंद्र सरकार को राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देनी चाहिए और विपक्ष को विश्वास में लेकर एकीकृत राष्ट्रीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। पार्टी का मानना है कि इससे भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत और विश्वसनीय आवाज के रूप में पुनः स्थापित किया जा सकता है।

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