झारखंड: सूचना आयुक्तों की नियुक्ति पर फिर लगा ग्रहण, राज्यपाल ने सरकार को लौटाई फाइल

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रांची: झारखंड में राज्य सूचना आयोग को पुनर्जीवित करने की कोशिशों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवारने सूचना आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़ी फाइल को बिना स्वीकृति दिए राज्य सरकार को वापस कर दिया है। इस फैसले से पिछले चार वर्षों से ठप पड़े आयोग के कामकाज के जल्द शुरू होने की उम्मीदों को बड़ा धक्का लगा है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
राज्यपाल ने फाइल लौटाते हुए सरकार को कड़ा परामर्श दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियुक्ति प्रक्रिया में अंजलि भारद्वाज बनाम भारत संघ मामला के फैसले और सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के प्रावधानों का गंभीरता से पालन किया जाना चाहिए।

राज्यपाल ने सवाल उठाया कि क्या नामों की अनुशंसा करते समय सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह अनुपालन किया गया है। साथ ही, राजभवन को प्राप्त विभिन्न संगठनों और व्यक्तियों के आपत्ति-पत्र भी फाइल के साथ संलग्न कर सरकार को वापस भेजे गए हैं।

राजनीतिक नियुक्तियों पर विवाद
सूत्रों के अनुसार, विवाद की मुख्य वजह प्रस्तावित नामों की पृष्ठभूमि है। सरकार द्वारा भेजे गए पैनल में अनुज कुमार सिन्हा, शिवपूजन पाठक, अमूल्य नीरज खलखो, तनुज खत्री और धर्मवीर सिन्हा के नाम शामिल थे।

इन नामों के सामने आते ही कई सामाजिक संगठनों ने विरोध दर्ज कराया। आपत्ति जताई गई कि पैनल में शामिल अधिकांश नाम सीधे तौर पर राजनीतिक दलों से जुड़े बताए जा रहे हैं, जिससे नियुक्ति प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

चार साल से ठप आयोग, पारदर्शिता पर असर
राज्य सूचना आयोग लंबे समय से निष्क्रिय पड़ा है, जिससे आरटीआई अपीलों और शिकायतों का निपटारा प्रभावित हो रहा है। ऐसे में यह फाइल लौटाए जाने से पारदर्शिता और जवाबदेही की प्रक्रिया पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

अब निगाहें राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं—क्या सरकार नए सिरे से पैनल तैयार करेगी या कानूनी पहलुओं को स्पष्ट कर उसी प्रस्ताव को दोबारा आगे बढ़ाएगी।

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