बिहार में बिजली दरों पर सियासी घमासान, तेजस्वी यादव का सरकार पर हमला, वादाखिलाफी का आरोप लगाया

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पटना, 30 मार्च

बिहार में 1 अप्रैल से बिजली दरों में संभावित बदलाव को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने चुनावी वादों से मुकरने का आरोप लगाया है।

‘मुफ्त बिजली’ वादे से पलटने का आरोप

तेजस्वी यादव ने कहा कि चुनाव के दौरान 125 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा किया गया था, लेकिन सरकार महज चार महीने में ही अपने वादे से पीछे हट गई।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा— “नीतीश-भाजपा फिर पलटी मार गई”, और अब जनता पर अधिक बिजली शुल्क का बोझ डालने की तैयारी हो रही है।

नई प्रस्तावित दरों का दावा

सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए तेजस्वी यादव ने नई संभावित बिजली दरों का उल्लेख करते हुए कहा कि:

  • शाम 11 बजे तक के 6 घंटे (पीक टाइम): ₹8.10 प्रति यूनिट
  • रात 11 बजे से सुबह 9 बजे तक (10 घंटे): ₹7.10 प्रति यूनिट
  • शेष 8 घंटे: ₹5.94 प्रति यूनिट

उन्होंने आरोप लगाया कि यह दरें आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालेंगी।

सरकार पर भ्रष्टाचार और खजाना खाली होने का आरोप

तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार का खजाना खाली हो चुका है और अब इसकी भरपाई जनता से वसूली के जरिए की जाएगी।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान भारी मात्रा में सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ और अब अगले पांच वर्षों तक उसकी भरपाई की जाएगी।

चुनाव प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल

तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाते हुए चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन हुआ।

‘आने वाले समय में हालात और बिगड़ेंगे’

अपने बयान में उन्होंने कहा कि राज्य में पहले से ही भ्रष्टाचार और अव्यवस्था की स्थिति है, और आने वाले समय में यह और गंभीर हो सकती है। बिजली दरों को लेकर बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। जहां विपक्ष सरकार को घेरने में जुटा है, वहीं अब सबकी नजर राज्य सरकार की आधिकारिक घोषणा और आगामी फैसलों पर टिकी है, जो आम जनता पर सीधा असर डालेंगे।

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