2030 तक रैबीज से शून्य मौत का लक्ष्य, झारखंड में लागू होगी राज्य कार्ययोजना

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रांची। झारखंड सरकार ने वर्ष 2030 तक रैबीज से होने वाली मौतों को शून्य पर लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस उद्देश्य को लेकर बुधवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तत्वावधान में नामकुम स्थित आरसीएच कॉन्फ्रेंस हॉल में राज्य स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें रैबीज नियंत्रण के लिए व्यापक राज्य कार्ययोजना तैयार करने पर चर्चा हुई।

अगस्त तक तैयार होगी कार्ययोजना, 28 सितंबर को होगी लॉन्च

बैठक की अध्यक्षता करते हुए एनएचएम के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि राज्य में रैबीज नियंत्रण के लिए व्यापक कार्ययोजना लागू की जाएगी। उन्होंने बताया कि इसका मसौदा जुलाई में तैयार किया जाएगा, अगस्त में इसे अंतिम रूप दिया जाएगा और 28 सितंबर (विश्व रैबीज दिवस) के अवसर पर औपचारिक रूप से लॉन्च किया जाएगा।

उन्होंने नागरिकों से भी इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।

अस्पतालों में वैक्सीन और इंजेक्शन की निर्बाध उपलब्धता के निर्देश

अभियान निदेशक ने सभी सरकारी अस्पतालों में एंटी-रैबीज वैक्सीन और रैबीज इम्यूनोग्लोबुलिन (इंजेक्शन) की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने सभी सिविल सर्जनों को कम से कम तीन माह का बफर स्टॉक बनाए रखने तथा स्टॉक कम होते ही समय पर नई आपूर्ति की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए, ताकि किसी भी मरीज को उपचार में परेशानी का सामना न करना पड़े।

वन हेल्थ मॉडल के तहत चलेगा अभियान

बैठक में कुत्तों के माध्यम से फैलने वाले रैबीज की रोकथाम के लिए वन हेल्थ (One Health) दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया गया। स्वास्थ्य, पशुपालन, नगर निगम, वन विभाग और पंचायती राज विभाग के अधिकारियों ने आपसी समन्वय से अभियान चलाने पर सहमति जताई।

बैठक में आवारा कुत्तों के मानवीय नियंत्रण, शेल्टर होम की व्यवस्था, भोजन प्रबंधन, टीकाकरण, जनजागरूकता और विभागीय समन्वय जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

कई विभागों के अधिकारी रहे मौजूद

बैठक में राज्य रैबीज नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल पदाधिकारी डॉ. बीरेंद्र कुमार सिंह, आईईसी के राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ. राहुल किशोर सिंह, रांची नगर निगम, पशुपालन निदेशालय, रिम्स तथा वन विभाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

अधिकारियों ने रैबीज नियंत्रण के लिए संयुक्त प्रयासों को और प्रभावी बनाने तथा राज्यभर में जागरूकता अभियान चलाने पर विशेष जोर दिया।

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