सहरसा। यूजीसी द्वारा जारी प्रमोशन ऑफ इक्वलिटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन-2026 के समर्थन में संयुक्त छात्र-युवा संघर्ष समिति के आह्वान पर जिला परिषद प्रांगण से समाहरणालय सहरसा तक विशाल प्रतिवाद मार्च निकालकर जिला पदाधिकारी को राष्ट्रपति के नाम स्मार पत्र सौंपा गया, जिसमें छात्र-युवा, सामाजिक कार्यकर्ता, आंदोलनकारी एवं विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
प्रतिवाद मार्च जिला परिषद प्रगांण से थाना चौक, वीर कुंवर सिंह, रविदास चौक होते हुए समाहरणालय पहुंचकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए जमकर नारेबाजी किया और यूजीसी नियमों को कॉलेज-विश्वविद्यालयों में प्रभावी रूप से लागू करने की जोरदार मांग उठाई।
इस मौके पर संयुक्त छात्र-युवा संघर्ष समिति के नेताओं ने कहा कि 13जनवरी को यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के लिए यूजीसी रेगुलेशन एक्ट-2026 को अनुचित किया, जो उच्च शिक्षा में जाति, धर्म, लिंग, भाषा, क्षेत्र पर आधारित भेदभाव को रोकने के लिए एक प्रभावी कानून था। इसको माननीय सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दुरुपयोग की आशंका मानकर 29 जनवरी को रोक लगा दिया है। इस रोक के खिलाफ व यूजीसी एक्ट-2026 को लागू करवाने की मांग को लेकर एससी एसटी, ओबीसी वर्ग के छात्र-छात्राओं पूरे देश में आंदोलित है और नेताओं ने कहा कि आज भी देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में दलित, आदिवासी, पिछड़े, अल्पसंख्यक एवं महिला विद्यार्थियों के साथ भेदभाव और उत्पीड़न की घटनाएं लगातार सामने आती रहती हैं।
रोहित वेमुला, पायल तड़वी और दर्शन सोलंकी जैसे छात्रों की मौत इस बात का प्रमाण है कि जातीय और सामाजिक भेदभाव एक गंभीर समस्या बनी हुई है। यूजीसी के जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 से 2024 के बीच जातीय भेदभाव से संबंधित शिकायतों में लगभग 118 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ऐसे में समानता से जुड़े यूजीसी के नियम भले ही पूर्ण रूप से पर्याप्त न हो लेकिन वे भेदभाव रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम थे।संयुक्त छात्र-युवा संघर्ष समिति के नेताओं ने केंद्र सरकार से मांग की कि तत्काल प्रभाव से एक सशक्त और प्रभावी “रोहित एक्ट” लागू किया जाए तथा यूजीसी गाइडलाइंस को और अधिक सख्त एवं प्रभावी बनाया जाए। प्रतिवाद मार्च में जिला परिषद उपाध्यक्ष धीरेन्द्र यादव, एनएसयूआई के पूर्व राष्ट्रीय संयोजक मनीष कुमार, एआईवाइएफ के शंकर कुमार, आरवाइए के राष्ट्रीय पार्षद कुंदन यादव, छात्र राजद के धीरज सम्राट, भारतीय विद्यार्थी मोर्चा के सनोज राम, अभाविप के कृष्णाकांत गुप्ता , छात्र लोजपा(रामविलास) के संदीप पासवान आदि शामिल थे।





