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शिवसेना UBT को बड़ा झटका: छह बागी सांसदों ने छोड़ी पार्टी, शिंदे गुट में शामिल होने की तैयारी

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मुंबई: शिवसेना (यूबीटी) में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। पार्टी के छह सांसदों ने बगावत करते हुए अलग गुट बना लिया है और वे 19 जून को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट में शामिल हो सकते हैं।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के कार्यालय ने इन छह सांसदों को अलग गुट के रूप में मान्यता दे दी है, जिससे उनके शिंदे गुट में शामिल होने का रास्ता साफ हो गया है।

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ये हैं बागी सांसद

शिवसेना (यूबीटी) के कुल नौ सांसद 2024 के लोकसभा चुनाव में जीते थे। इनमें से धाराशिव से ओमराजे निंबालकर, परभणी से संजय जाधव, मुंबई उत्तर-पूर्व से संजय दीना पाटिल, हिंगोली से नागेश पाटिल अष्टिकर, शिरडी से भाऊसाहेब वाकचौरे और यवतमाल-वाशिम से संजय देशमुख ने पार्टी से अलग होकर नया गुट बनाया है।

वहीं, अनिल देसाई, अरविंद सावंत और राजाभाऊ वाजे अब भी शिवसेना (यूबीटी) के साथ बने हुए हैं।

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शिंदे गुट का दावा—‘ऑपरेशन प्रगति’ सफल

शिंदे गुट की राष्ट्रीय प्रवक्ता साईना एनसी ने कहा कि उनकी पार्टी का ‘ऑपरेशन प्रगति’ सफल रहा है और जल्द ही सभी बागी सांसद औपचारिक रूप से उनके गुट में शामिल हो जाएंगे।

कानूनी प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की कानूनी टीम दिल्ली पहुंच चुकी है और इन सांसदों के शामिल होने से जुड़ी संवैधानिक औपचारिकताओं को पूरा करने की प्रक्रिया जारी है। शिंदे ने निर्देश दिया है कि सभी कदम नियमों के तहत उठाए जाएं, ताकि किसी तरह के कानूनी विवाद से बचा जा सके।

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यूबीटी का आरोप—दबाव में कराया गया विभाजन

शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता संजय राऊत ने आरोप लगाया कि सांसदों को दबाव डालकर तोड़ा गया है। वहीं शिंदे गुट के सांसद नरेश म्हस्के ने कहा कि ये सभी सांसद पार्टी नेतृत्व से नाराज थे और अपनी मर्जी से अलग हुए हैं। उन्होंने राऊत को सलाह दी कि वे पहले अपने सांसदों की समस्याओं पर ध्यान दें।

स्पीकर को लिखी गई थी चिट्ठी

यूबीटी के नेताओं अरविंद सावंत, अनिल देसाई और संजय राऊत ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर इन सांसदों को अलग गुट की मान्यता न देने की मांग की थी, लेकिन स्पीकर ने इसे खारिज कर दिया।

इस फैसले के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इसके बड़े राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं।

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