देहरादून/चमोली, 23 अप्रैल: उत्तराखंड के बदरीनाथ धाम के कपाट गुरुवार सुबह वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ ठीक 6:15 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलते ही पूरा धाम श्रद्धालुओं के जयकारों और भक्ति भाव से गूंज उठा।
15 हजार श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
इस पावन अवसर पर देश-विदेश से आए लगभग 15 हजार श्रद्धालुओं ने भगवान बद्री विशाल और अखंड ज्योति के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। पारंपरिक वाद्य यंत्रों और सेना के बैंड की मधुर धुन ने वातावरण को और भी दिव्य बना दिया।
पहली पूजा पीएम के नाम से
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कपाट खुलने के बाद नरेंद्र मोदी के नाम से पहली महाभिषेक पूजा संपन्न कराई और देश-प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की।
परंपराओं का हुआ निर्वहन
कपाट खुलने के साथ ही मां लक्ष्मी की मूर्ति को उनके मूल मंदिर में स्थापित किया गया। साथ ही शंकराचार्य की गद्दी, उद्धव और गरुड़ की डोली का मंदिर में प्रवेश कराकर उन्हें गर्भगृह में विधिवत स्थापित किया गया।
चारधाम यात्रा की मजबूत तैयारियां
राज्य सरकार, बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन ने यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। मुख्यमंत्री ने व्यवस्थाओं का फीडबैक लेते हुए कहा कि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा और अनुभव देने के लिए हर स्तर पर तैयारी की गई है।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश
मुख्यमंत्री धामी ने श्रद्धालुओं से स्वच्छ और हरित चारधाम यात्रा में सहयोग करने की अपील की और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
लोक संस्कृति की झलक
कपाट खुलने के अवसर पर माणा और बामणी गांव की महिलाओं ने पारंपरिक ‘जागर’ और ‘झुमैलो’ नृत्य प्रस्तुत किया, जिससे पूरा धाम लोक संस्कृति और आस्था के रंग में रंग गया।
भंडारे का शुभारंभ
मुख्यमंत्री ने भंडारे का शुभारंभ कर श्रद्धालुओं के साथ प्रसाद ग्रहण किया और व्यवस्थाओं की सराहना की। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारी, मंदिर समिति के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
चारधाम यात्रा की शुरुआत के साथ ही बदरीनाथ धाम में आस्था, परंपरा और सुव्यवस्थित व्यवस्थाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला।






