—20 स्नातकोत्तर टॉपरों को स्वर्ण पदक, नौ स्नातक टॉपरों को प्रमाण पत्र और 36 शोधार्थियों को मिली पीएचडी की उपाधि
हजारीबाग, 30 अक्टूबर । झारखंड के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। देश का उत्थान केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि शिक्षित, कुशल, जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिकों के योगदान से सुनिश्चित होगा। विद्यार्थियों को अपने व्यक्तिगत लक्ष्यों को राष्ट्र की प्रगति से जोड़कर आगे बढ़ना चाहिए।
राज्यपाल शुक्रवार को हजारीबाग स्थित विनोबा भावे विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह में 20 स्नातकोत्तर टॉपरों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए, जबकि नौ स्नातक टॉपरों को प्रमाण पत्र दिया गया। इसके अलावा 36 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि से सम्मानित किया गया।
शिक्षा का वास्तविक मूल्य समाज के हित में उसके उपयोग से तय होता है
विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद सभागार में आयोजित समारोह में राज्यपाल ने कहा कि उपाधि शिक्षा प्राप्त करने का प्रमाण है, लेकिन ज्ञान का वास्तविक मूल्य इस बात से तय होता है कि उसका उपयोग समाज और देश के हित में किस तरह किया जाता है। विद्यार्थियों को निरंतर सीखते रहने और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप अपनी क्षमताओं का विकास करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि आचार्य विनोबा भावे के नाम पर स्थापित इस विश्वविद्यालय के लिए उनके जीवन और विचार प्रेरणा के स्रोत हैं। भूदान आंदोलन के माध्यम से विनोबा भावे ने मानवता, करुणा, सामाजिक सहयोग और न्याय का संदेश दिया था। उनके विचार बताते हैं कि शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत उन्नति नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना भी होना चाहिए।
विज्ञान, तकनीक और नवाचार में युवाओं के लिए नए अवसर
राज्यपाल ने कहा कि भारत विज्ञान, तकनीक, अंतरिक्ष, डिजिटल सेवाओं, उद्यमिता और नवाचार के क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। स्टार्टअप इंडिया, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहल युवाओं के लिए नए अवसर पैदा कर रही हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से इन अवसरों का लाभ उठाने और नए विचारों को उद्यम का रूप देने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि ज्ञान के साथ विवेक और कौशल के साथ नैतिकता को भी महत्व देना जरूरी है।
झारखंड की प्रतिभा और जनजातीय परंपराएं हैं विशेष पहचान
झारखंड की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्राकृतिक संपदा, सांस्कृतिक विविधता और समृद्ध जनजातीय परंपराएं राज्य की विशेष पहचान हैं। यहां के युवाओं की प्रतिभा और परिश्रम राज्य की वास्तविक शक्ति है।
उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों को युवाओं की प्रतिभा को सही दिशा देने के साथ शोध, नवाचार और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप समाधान विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और नैतिक मूल्यों पर दिया जोर
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान और नैतिक मूल्यों को समान महत्व देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को ऐसे नागरिक तैयार करने चाहिए, जो अपने अधिकारों के प्रति सजग, कर्तव्यों के प्रति प्रतिबद्ध और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में सक्षम हों।






