पटना, 01 अप्रैल — बिहार के उपमुख्यमंत्री और खनन एवं भूतत्व विभाग के मंत्री Vijay Sinha ने बुधवार को पत्रकार वार्ता में बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान कुल 3,592 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जो राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि राज्य के 21 जिलों ने 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया, जिससे इस सफलता में अहम योगदान रहा।
खनन विभाग में पारदर्शिता और “राजस्व आधारित” व्यवस्था
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पहले खनन विभाग पर बाहुबलियों का दबदबा रहता था, लेकिन अब यह पूरी तरह “भय” से बाहर निकलकर राजस्व आधारित प्रणाली में बदल चुका है। वर्तमान में बिहार में 473 बालू घाट संचालित हो रहे हैं, जबकि 78 घाट संचालकों द्वारा समर्पित किए गए हैं, जिससे करीब 600 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। ऐसे घाट अवैध खनन के उद्देश्य से अधिक बोली लगाने पर लिए गए थे, लेकिन अब इन्हें छोड़ना पड़ा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि समर्पण करने वाले संचालकों को भविष्य में किसी भी टेंडर प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाएगा।
डिजिटल पहल और निगरानी
विजय सिन्हा ने कहा कि खनन व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए कई डिजिटल कदम उठाए गए हैं:
- खनिज परिवहन के लिए ई-चालान सॉफ्टवेयर लागू
- लाइसेंस प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन
- बालू से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध
इसके अलावा, “बिहारी योद्धा पुरस्कार” के तहत अवैध खनन की सूचना देने वाले 96 लोगों को सम्मानित किया गया।
नई नीलामी और निवेश प्रोत्साहन
खनन क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए नई नीलामी प्रक्रिया शुरू की गई है। रोहतास में 3 खनिज ब्लॉक की नीलामी की प्रक्रिया चल रही है, जिसकी टेंडर की अंतिम तारीख 25 मई है। इसके अलावा, बांका में कॉपर, लेड और जिंक ब्लॉक की नीलामी भी होगी।
विजय सिन्हा ने कहा कि अब दूसरे राज्यों से बालू या अन्य खनिज लाने वाले वाहनों के लिए ट्रांजिट पास अनिवार्य होगा, और नियम का उल्लंघन करने पर 25 गुना तक जुर्माना लगाया जाएगा।
पत्थर खनन के लिए नई नीति
उन्होंने बताया कि सरकार ने पत्थर खनन को व्यवस्थित करने के लिए 30 स्थानों का चयन किया है। जल्द ही इन क्षेत्रों के लिए नई नीति और प्रक्रिया की घोषणा की जाएगी।





