वंदे भारत डिपो हादसा: करंट लगने से टेक्नीशियन की मौत के बाद टाटानगर स्टेशन पर धरना, मुआवजे और कार्रवाई की मांग

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जमशेदपुर, 07 जून: टाटानगर रेलवे स्टेशन स्थित वंदे भारत एक्सप्रेस डिपो में करंट लगने से गंभीर रूप से झुलसे टेक्नीशियन आशीष मांझी की मौत के बाद रविवार को परिजनों और स्थानीय लोगों का आक्रोश फूट पड़ा। घटना के विरोध में लोगों ने रेलवे स्टेशन पर धरना दिया और मुआवजा, नौकरी तथा दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।

मरम्मत के दौरान हुआ हादसा

परसुडीह निवासी आशीष मांझी 30 मई की रात वंदे भारत ट्रेन की एसी प्रणाली की मरम्मत के दौरान हाई वोल्टेज करंट की चपेट में आ गए थे। गंभीर रूप से झुलसने के बाद उन्हें टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान शनिवार शाम उनकी मौत हो गई।

परिजनों का प्रदर्शन

मौत की खबर मिलते ही परिजन और स्थानीय लोग टाटानगर रेलवे स्टेशन पहुंचे और धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा, एक सदस्य को स्थायी नौकरी और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।

थाना में शिकायत, FIR की मांग

परिजन जीआरपी थाना भी पहुंचे और हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी और लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ।

ठेका कंपनी ने उठाए सवाल

मृतक की ठेका कंपनी ‘अमित इंजीनियर्स’ ने भी पत्र के माध्यम से गंभीर आरोप लगाए हैं। कंपनी का कहना है कि उचित इलेक्ट्रिकल आइसोलेशन और पावर शटडाउन सुनिश्चित किए बिना कर्मचारी को ट्रेन की छत पर काम करने भेजा गया था। कंपनी ने संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कर कार्रवाई की मांग की है।

स्टेशन पर तनावपूर्ण स्थिति

धरने के दौरान कुछ समय के लिए स्टेशन परिसर में तनावपूर्ण माहौल बन गया। सूचना मिलने पर आरपीएफ, जीआरपी और स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से वार्ता कर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।

पोस्टमार्टम पर रोक

आशीष मांझी का शव फिलहाल टीएमएच में रखा गया है। परिजनों ने साफ कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक वे पोस्टमार्टम की अनुमति नहीं देंगे।

परिवार पर संकट

परिजनों के अनुसार आशीष परिवार के मुख्य कमाऊ सदस्य थे। उनकी असमय मौत से परिवार के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन और रेलवे अधिकारी लगातार परिजनों से बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास कर रहे हैं।

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