लोकसभा में पास हुआ दिवाला एवं दिवालियापन संहिता (संशोधन) विधेयक-2025, आर्थिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम

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नई दिल्ली, 30 मार्च ।

लोकसभा ने सोमवार को ध्वनि मत से दिवाला और दिवालियापन संहिता (संशोधन) विधेयक-2025 पारित कर दिया। इस विधेयक का उद्देश्य दिवाला और दिवालियापन संहिता 2016 में संशोधन कर प्रक्रियागत देरी और व्याख्या संबंधी समस्याओं को दूर करना है।

प्रवर समिति की सिफारिशों पर आधारित संशोधन

यह विधेयक पहले एक प्रवर (सेलेक्ट) समिति को भेजा गया था। कुल 12 संशोधनों में से 11 समिति की सिफारिशों पर आधारित हैं, जबकि एक संशोधन सरकार द्वारा जोड़ा गया है।

‘केवल कर्ज वसूली नहीं, व्यवसाय बचाना उद्देश्य’

विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि आईबीसी का उद्देश्य केवल ऋण वसूली नहीं, बल्कि:

  • व्यवहार्य व्यवसायों को बचाना
  • वित्तीय संकट का समाधान
  • उद्यमों के मूल्य को बनाए रखना

उन्होंने कहा कि यह कानून बैंकिंग क्षेत्र को मजबूत करने और तनावग्रस्त संपत्तियों (Stressed Assets) के समाधान में महत्वपूर्ण साबित हुआ है।

आईबीसी की उपलब्धियां

वित्त मंत्री ने सदन को बताया कि दिसंबर 2025 तक:

  • 1,376 कंपनियों का समाधान किया गया
  • लेनदारों को ₹4.11 लाख करोड़ की वसूली हुई

नई प्रक्रिया से तेज होगा समाधान

नए संशोधन के तहत कम इस्तेमाल होने वाली फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया को हटाकर एक नई व्यवस्था लाई जा रही है। इसमें शामिल हैं:

  • लेनदार द्वारा शुरू की जाने वाली प्रक्रिया
  • अदालत के बाहर समझौते (Out-of-court settlement)
  • ‘देनदार के पास नियंत्रण’ मॉडल
  • ‘लेनदार के पास नियंत्रण’ मॉडल

इससे दिवालियापन प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और समयबद्ध बनाने की उम्मीद है।

दिवाला एवं दिवालियापन संहिता (संशोधन) विधेयक-2025 के पारित होने से भारत में कॉर्पोरेट और वित्तीय ढांचे को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह बदलाव निवेशकों का विश्वास बढ़ाने और आर्थिक स्थिरता को मजबूती देने में सहायक हो सकता है।

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