रांची। चुनावी प्रक्रिया और मतदाता के वोट के अधिकार को लेकर मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने केंद्र की भाजपा सरकार और निर्वाचन प्रक्रिया पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने वोट चोरी और मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के आरोपों को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए अब आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने इसे ‘लोकतंत्र बचाओ-जनमत बचाओ’ अभियान से जोड़ते हुए झारखंड से हजारों लोगों के दिल्ली कूच का दावा भी किया।
चुनावी प्रक्रिया पर उठाए सवाल
डॉ. इरफान ने अपने बयान में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों में वोट के अधिकार को प्रभावित करने और मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े गंभीर सवाल सामने आए हैं, जिनका जवाब देश की जनता को मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक का वोट उसकी सबसे बड़ी ताकत है। यदि किसी मतदाता का नाम सूची से हटता है या उसका मत देने का अधिकार प्रभावित होता है तो यह केवल चुनावी प्रक्रिया का विषय नहीं, बल्कि उसके संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकार से जुड़ा मामला है।
मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर भी निशाना
मंत्री ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया से जुड़े विवादों और आरोपों के बीच निर्वाचन आयोग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
डॉ. इरफान ने ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि उन्हें जनता के सामने आकर चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देना चाहिए।
हालांकि, मंत्री की ओर से लगाए गए वोट चोरी और चुनावी प्रक्रिया में अनियमितता संबंधी आरोप उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं। उनके बयान में इन आरोपों के समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है।
SIR प्रक्रिया को लेकर जताई आपत्ति
मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़ी S.I.R. प्रक्रिया को लेकर भी डॉ. इरफान ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से किसी नागरिक का नाम हटने या उसका वोट प्रभावित होने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति के लोकतांत्रिक अधिकार पर सीधा असर पड़ सकता है।
उन्होंने मांग की कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े इन सवालों का निष्पक्ष तरीके से परीक्षण और जांच होनी चाहिए तथा जनता के बीच स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
भाजपा शासित राज्यों पर भी साधा निशाना
डॉ. इरफान ने देश के विभिन्न राज्यों में भाजपा की सरकारों के गठन और उनके कामकाज को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात और हरियाणा का उल्लेख करते हुए इन राज्यों की सरकारों पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता का मूल्यांकन जनता के अधिकारों, संविधान और शासन के कामकाज के आधार पर होना चाहिए। उनके अनुसार किसी भी सरकार से सवाल पूछना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है।
‘देश किसी राजनीतिक दल की जागीर नहीं’
मंत्री ने कहा कि देश किसी राजनीतिक दल या सत्ता की जागीर नहीं है। उन्होंने जनता और संविधान को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में अंतिम शक्ति जनता के पास होती है।
उन्होंने कहा कि संविधान, लोकतंत्र और जनता का जनमत किसी भी राजनीतिक दल से ऊपर है और इनके अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाना जरूरी है।
झारखंड से दिल्ली कूच का दावा
अपने बयान के अंत में डॉ. इरफान ने झारखंड से हजारों लोगों के दिल्ली कूच का दावा किया। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया और मतदाता अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर व्यापक जनअभियान चलाया जाएगा।
उन्होंने लोगों से ‘लोकतंत्र बचाओ-जनमत बचाओ’ अभियान से जुड़ने का आह्वान किया और कहा कि अब लोकतंत्र की रक्षा के लिए आंदोलन किया जाएगा।
‘अब उलगुलान होगा’
डॉ. इरफान ने अपने बयान को आक्रामक राजनीतिक तेवर के साथ समाप्त करते हुए कहा कि लोकतंत्र और जनमत के अधिकार के साथ कथित तौर पर खिलवाड़ का दौर अब नहीं चलने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि “लोकतंत्र की हत्या का खेल अब नहीं चलेगा, अब उलगुलान होगा।”
उन्होंने जनता से लोकतांत्रिक अधिकारों और संविधान की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील की।






