रोहतास में जमीन घोटाले का बड़ा खुलासा, 26 एकड़ संपत्ति हड़पने का आरोप

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रोहतास, 10 अप्रैल। बिहार के रोहतास जिले में जमीन घोटाले का सनसनीखेज मामला सामने आया है। कोचस अंचल के ग्राम सरेयां में करीब 26 एकड़ पुश्तैनी संपत्ति को कथित साजिश के तहत राजस्व रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर हड़पने का आरोप लगा है।

राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर के आरोप

मामले में आरोप है कि एक महिला और उसके बेटों के नाम पर जमीन दर्ज कराने के लिए राजस्व अभिलेखों में गड़बड़ी की गई। इस पूरे प्रकरण में विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।

बेटियों का नाम रिकॉर्ड से गायब

शिकायतकर्ता रजनीकांत तिवारी के अनुसार, स्व. मारकण्डेय तिवारी की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी और तीनों बेटियों का संपत्ति पर बराबर हक था। दाखिल-खारिज के बाद वर्षों तक चारों के नाम से रसीद भी कटती रही, लेकिन बाद में दो बहनों का नाम रिकॉर्ड से हटा दिया गया।

लोक अदालत पहले ही बता चुकी जालसाजी

बताया गया कि वर्ष 2011 में फर्जी हस्ताक्षर के जरिए पूरी संपत्ति अपने नाम कराने की कोशिश की गई थी। इस मामले में 16 मार्च 2012 को लोक अदालत सासाराम ने डिग्री रद्द करते हुए इसे जालसाजी करार दिया था।

फिर भी दोबारा बदल दिए गए रिकॉर्ड

आरोप है कि अदालत की टिप्पणी के बावजूद जमीन को दोबारा राजस्व रिकॉर्ड में बदला गया। करीब 19 एकड़ 23 डिसमिल जमीन बेटों के नाम और 6 एकड़ 78 डिसमिल जमीन महिला के नाम दर्ज करा दी गई।

म्यूटेशन फाइल गायब, RTI का जवाब नहीं

मामले को और गंभीर बनाता है म्यूटेशन केस (455/16-17), जिसकी फाइल ही गायब बताई जा रही है। अंचल कार्यालय ने लिखित में रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात कही है। वहीं आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी भी तय समय सीमा में नहीं दी गई।

खरीदार भी फंसे, म्यूटेशन पर रोक

इस विवाद का असर तीसरे पक्ष पर भी पड़ा है। बड़ी बहन द्वारा बेची गई जमीन के खरीदारों का म्यूटेशन भी अटका हुआ है, जिससे वे कानूनी और आर्थिक संकट में हैं।

बड़ा सवाल: बेटों के नाम कैसे हुई जमीन?

शिकायत में यह भी सवाल उठाया गया है कि मां के जीवित रहते ननिहाल की संपत्ति में बेटों का सीधा अधिकार नहीं होता, फिर भी उनके नाम जमीन कैसे दर्ज हो गई।

उच्च स्तरीय जांच की मांग

पीड़ित पक्ष ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच, राजस्व रिकॉर्ड में सुधार, वास्तविक हकदारों के नाम बहाल करने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

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