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राज्‍य में पांच वर्षों में होगा 50 लाख करोड़ का निवेश: दिलीप जायसवाल

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-747 निवेश प्रस्ताव, 17 हजार करोड़ से अधिक के प्रोजेक्ट्स पर काम जारी
-एक्‍सप्रेसवे नेटवर्क

औद्योगिक कारिडोरों के विकास, शहरी अवसंरचना के सुदृढ़करण और बेहतर हवाई संपर्क का तेजी से हो रहा कार्य

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पटना: उद्योग मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि मुख्‍यमंत्री नितीश कुमार के दूरदर्शी नेतृत्‍व में बिहार का औद्योगिक विकास निरंतर सशक्ति गत‍ि के साथ आगे बढ़ रहा है। राज्‍य में पांच वर्षों के अंदर 50 लाख करोड़ का निवेश होगा। जिससे राज्‍य में 1 करोड़ रोजगार के अवसर सृजित हो सकें। एक से डेढ़ वर्ष के अंदर 78 वर्षों में जो उद्योग बिहार में नहीं लगा उसे मैं धरातल पर उतारकर दिखाउंगा। मैं बातों पर नहीं, धरातल पर उतारने में विश्‍वास रखता हूं। उद्योग मंत्री सोमवार को सूचना एवं जन संपर्क विभाग में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान उक्‍त बातें कही।
उन्‍होंने कहा कि राज्‍य में कई सुशासन और नीतिगत स्थिरता के मजबूत आधार पर राज्य सरकार ने हितधारकों के साथ सतत संवाद को प्रोत्साहित किया है, जिससे एक वास्तविक उद्‌द्योग अनुकूल वातावरण का निर्माण हो सका है। इन निरंतर प्रयासों के फलस्वरूप बिहार आज राष्ट्रीय पटल पर पूर्वी भारत के एक उभरते हुए विकास इंजन के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर रहा है। राज्‍य में तीव्र गति से एक्सप्रेसवे नेटवर्क, औ‌द्योगिक कॉरिडोरों के विकास, शहरी अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण, बेहतर हवाई संपर्क, पॉवर प्‍लांट तथा सशक्त लॉजिस्टिक्स ढांचे के माध्यम से मजबूती प्रदान की जा रही है। देश के शीर्ष निवेश गंतव्यों में बिहार को स्थापित करने के लक्ष्य के अनुरूप राज्य सरकार विश्वस्तरीय औ‌द्योगिक टाउनशिपों एवं आधुनिक औ‌द्योगिक क्षेत्रों में निरंतर निवेश कर रही है, जिन्हें मजबूत ट्रंक अवसंरचना का समर्थन प्राप्त है, ताकि तीव्र, समावेशी और सतत औ‌द्योगिक विकास सुनिश्चित किया जा सके।
उन्‍होंने कहा कि बिहार में तेजी से विकास हो रहा है। हाल ही में बक्‍सर में कोका कोला फैक्‍ट्री, जेके सुपर सीमेंट फैक्‍ट्री का उद्घाटन कर चुके हैं। दरभंगा और मुजफ्फरपुर में लेदर फैक्‍ट्री लगा चुके हैं। वैशाली जिले के राजापाकड़ में राष्‍ट्रीय स्‍तर की निफ्टेम कंपनी लगाने जा रहे हैं। कनेक्‍टीविटी बेहतर बनाने के लिए कार्य किये जा रहे हैं। भागलपुर के पीरपैती में 30 हजार करोड़ की लागत से 2400 मेगा वाट का पॉवर प्‍लांट लग रहा है। वहीं औरंगाबाद में पॉवर प्‍लांट तैयार होने जा रहा है।
उद्योग मंत्री डॉ जायसवाल ने कहा कि औद्‌योगिक विकास को सात निश्चय-3 (2025-2030) के अंतर्गत सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की गई है, जिसकी परिकल्पना “समृद्ध उ‌द्योग-सशक्त बिहार” के रूप में की गई है। नई सरकार ने अपने पहले मंत्रिपरिषद बैठक में ही तीन उच्चस्तरीय एपेक्स समितियां का गठन कर अपनी प्रतिबद्धता को स्पष्ट कर दिया। इन समितियों को बिहार को एक पूर्वी टेक हब के रूप में स्थापित करने, इसे एक वैश्विक बैंक एंड हब एवं वैश्विक कार्यस्थल के रूप में विकसित करने, तथा स्टार्टअप और नव युग की अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों में रोजगारोन्मुख गतिविधियों के व्यापक विस्तार का स्पष्ट दायित्व सौंपा गया है। ये संस्थागत व्यवस्थाएं विभिन्न विभागी और क्षेत्रों में रणनीतिक पहलों के समन्वित, समयबद्ध एवं परिणामोन्मुखी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए स्थापित की गई है। एमएसएमई क्षेत्र के समग्र विकास के उ‌द्देश्य से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम निदेशालय के गठन स्थापना को स्वीकृति दी गई है।
उन्‍होंने कहा कि बिहार राज्य विपणन प्राधिकार (बीएसएमए) की स्थापना राज्य के नोडल निकाय के रूप में की गई है, जिसका उ‌द्देश्य सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमइएस), कृषि-आधारित उद्‌द्योगों, कुटीर उ‌द्योगों, हस्तशिल्प तथा ग्रामीण उ‌द्यमों से संबंधित उत्पादों के विपणन, ब्रांडिंग एवं प्रचार-प्रसार का कार्य करना है।

नए उद्योगों को बढ़ावा देने हेतु नीतिगत पहल

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उद्योग मंत्री ने कहा कि वैश्विक तथा घरेलू निवेशकों को और अधिक आकर्षित करने के उ‌द्देश्य से राज्य सरकार ‌द्वारा बिहार औ‌द्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज (बीआइआइपीपी), 2025 लागू किया गया है, जो देश के सर्वश्रेष्ठ निवेश प्रोत्साहन पैकेजों में से एक है। बिहार सेमीकंडक्टर नीति, 2026 को हाल ही में राज्य मंत्रिपरिषद द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई है, जो भारत सरकार की योजनाओं के अनुरूप हैं। इन नीति का उद्देश्य बिहार को भारत के पूर्वी क्षेत्र में एक उभरते हुए प्रौ‌द्योगिकी हब के रूप में स्थापित करना है। इसके तहत सेमीकंडक्टर तथा संबद्ध इलेक्ट्रॉनिक्स मूल्य श्रृंखला-जिसमें डिजाइन, फैब्रिकेशन, असेंबली, परीक्षण एवं पैकेजिंग शामिल हैं। इसके अलावा बीआईआईपीपी 2025 को पूरक रूप में राज्य सरकार द्वारा विभिन्न क्षेत्र-विशेष नीतियों का एक व्यापक ढांचा भी लागू किया गया है, जिसका उ‌द्देश्य लक्षित निवेश को प्रोत्साहित करना है। इनमें बिहार बॉयोफ्यूल्स उत्पादन प्रोत्साहन (संशोधन) नीति, निर्यात प्रोत्साहन नीति, 2024, बिहार लॉजिस्टिक्स नीति, 2024, वस्त्र एवं चमड़ा नीति, 2022 तथा बिहार स्टार्ट-अप नीति, 2022 सहित अन्य नीतियां सम्मिलित हैं। बिहार की औ‌द्योगिक नीतियां आज देश की सबसे प्रतिस्पर्धी नीतियों में शामिल हैं।

नीतिगत पहलों के प्रचार हेतु निवेशक संवाद

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उद्योग मंत्री ने कहा कि उ‌द्योग विभाग द्वारा निवेशकों को राज्य में बड़ी संख्या में आमंत्रित करने के लिये देश-विदेश में बैठकों का आयोजन किया गया, जिनमें मार्च 2026 में थाईलैंड में लोटस ट्रायंगल मेगा लॉन्च और रोड शो, बेंगलुरु रोड शो, फरवरी में कोलकाता में एक्जिम सम्मेलन, एआई इम्पैक्ट समिट, नई दिल्ली, मेगा निर्यात प्रोत्साहन कार्यक्रम, पटना, अगस्त, मुम्बई में महावर्ल्ड एक्सपो समिट 2025, मुम्बई में ही सीआईआई ईस्‍ट इंडिया समिट 2025, सितम्बर, 2025 में नई दिल्ली में आयोजित मेड टेक एक्‍सपो 2025 एवं बिहार औ‌द्योगिक प्रोत्साहन नीति डायलॉग आयोजित किया गया। इन आयोजनों में उद्‌यमियों से प्राप्त सुझावों के आलोक में राज्य में औ‌द्योगिक ढांचा को और मजबूत करने का प्रयास राज्य सरकार द्वारा किया जा रहा है।

वर्ष 2025-26 में राज्य में निवेश प्रस्तावों की प्रमुख उपलब्धियां


उन्‍होंने कहा कि वर्ष 2025-26 में राज्य ने निवेश के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। इस अवधि के दौरान कुल 747 निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनके अंतर्गत 17,217 करोड़ से अधिक के निवेश का प्रस्ताव किया गया है। इसके अतिरिक्त, बियाडा के माध्यम से 317 निवेशकों को 404 एकड़ भूमि आवंटित कर 5500 करोड़ निवेश और 22,500 से अधिक रोजगार की संभावनाएं उत्पन्न की गई हैं, जिनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड, जेके लक्ष्मी सीमेंट, एपीक एग्रो (कैम्पा कोला), श्याम स्टील प्रा. लिमिटेड (पेंट डिवीजन), पीडी लाइमलाइट इंडस्ट्रीज, मदर डेयरी, आदित्य बिरला समूह (अल्ट्राटेक टेक्सटाइल डिवीजन) एवं हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉपरिशन लिमिटेड का नाम उल्लेखनीय है।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से संबंधित पहल


बिहार को नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम- एनएसडब्‍लूएस के साथ एकीकृत किया गया है, जिसके माध्यम से केंद्रीय एवं राज्य स्तर की स्वीकृतियों के लिए युनिफाइड मंच उपलब्ध कराया गया है। जन विश्वास अधिनियम के अनुरूप एक राज्य स्तरीय अधिनियम को स्वीकृति प्रदान की गई है, जिस पर माननीय राज्यपाल द्वारा हस्ताक्षर किए जा चुके हैं।

कारखानों में सुबह 5 से रात 10 बजे तक कार्य कर सकती हैं महिलाएं


उन्‍होंने कहा कि अब महिलाओं को कारखानों में सुबह 5 बजे से रात्रि 10 बजे तक कार्य करने की अनुमति प्रदान की गई है, बशर्ते सुरक्षित कार्य-परिस्थितियों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। कर्मचारियों की सहमति के साथ कारखाने प्रतिदिन अधिकतम 12 घंटे (विश्राम अंतराल सहित) तक संचालन कर सकते हैं, बशर्ते साप्ताहिक कार्य-सीमा 48 घंटे बनी रहे। साथ ही गैर-कार्य दिवसों के लिए सवेतन अवकाश प्रदान किया जाएगा। औ‌द्योगिक विवाद अधिनियम में संशोधन के अंतर्गत प्रतिष्ठानों के बंद होने, कर्मियों की छंटनी एवं अस्थायी रूप से कार्यमुक्ति (ले-ऑफ) के लिए लागू सीमा को 100 श्रमिकों से बढ़ाकर 300 श्रमिकों किया गया है। इससे निरंतर औ‌द्योगिक संचालन को संरक्षण मिला है तथा अल्पकालिक श्रम के दुरुपयोग में कमी आएगी।

प्रमुख औ‌द्योगिक परियोजनाएं


अमृतसर-कोलकाता औ‌द्योगिक कॉरिडोर (एकेआइसी) परियोजना के अतर्गत गया जिले के डोभी प्रखंड में चयनित 1,670.22 एकड़ भूमि पर लगभग 1,339 करोड़ की अनुमानित लागत से बिहार इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी गया लिमिटेड (बीआईएमसीजीएल) का विकास किया जा रहा है। उक्त परियोजना का शुभारंभ शीघ्र ही आगामी दिनों में किया जाना प्रस्तावित है। औ‌द्योगिक क्षेत्र, महवल में 62.17 एकड़ भूमि पर लेदर पार्क का निर्माण किया जा रहा है। मुजफ्फरपुर स्थित औ‌द्योगिक क्षेत्र में टेक्सटाइल एवं बैग निर्माण हेतु स्थापित प्लग-एंड-प्ले शेड में कुल 554.57 करोड़ का निवेश किया गया है, जिसके अंतर्गत लगभग 3,600 कर्मी कार्यरत हैं। औ‌द्योगिक क्षेत्र दामोदरपुर के मेगा फूड पार्क में अबतक 587.18 करोड़ से अधिक का निवेश हुआ है। औ‌द्योगिक क्षेत्र नवानगर (बक्सर) में 109.01 करोड़ एव औ‌द्योगिक क्षेत्र कुमारबाग (पश्चिमी चम्पारण) में 116.28 करोड़ की लागत से स्‍पेशल इकोनॉमी जोन (एसईजेड) विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा औ‌द्योगिक क्षेत्र झंझारपुर को मॉडल ग्रीन औ‌द्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। राज्य के कुछ जिलों में इंटीग्रेटेड इंडस्‍ट्रीयल टाउनशिप विकसित किये जाने का प्रस्ताव है। फतुहा के जैतिया मौजा में मल्टी मॉडल लाजिस्टिक पार्क का निर्माण 102 एकड़ भूमि में विकसित किया जा रहा है एवं इसके नजदीक 242 एकड़ जमीन पर फिनटेक सिटी विकसित करने की भी योजना प्रस्तावित है, जिससे कि आई.टी. फिनटेक कंपनियों को रेडी-टू-यूज इन्फ्रा उपलब्ध करायी जा सके। इसके अतिरिक्त बिहार के लगभग सभी जिलों में औ‌द्योगिक क्षेत्र के स्थापना हेतु जमीन अधिग्रहण प्रक्रियाधीन है। साथ ही बियाडा के सभी औ‌द्योगिक क्षेत्रों के उन्नयन का कार्य सत प्रक्रियाधीन है।

10 जिलों में कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावास की स्‍थापना


उद्योग मंत्री ने बताया कि राज्य के विभिन्न जिलों-पूर्णिया, बेगूसराय, मधुबनी, पश्चिमी चम्पारण, फतुहा, औरंगाबाद, बक्सर, बिहटा, हाजीपुर एवं मुजफ्फरपुर में कुल 10 कामकाजी महिला छात्रावासों की स्थापना की जा रही है, जिनका निर्माण कार्य वर्तमान में प्रगति पर है। राज्य में पीपीपी मोड में एक इलेक्ट्रॉनिक पार्क की स्थापना की योजना है।

पीपीपी मोड पर पटना में बनेंगे तीन पांच सितारा होटल


उन्‍होंने कहा कि बिहार राज्य के अंतर्गत पीपीपी के तहत कार्य हेतु नोडल ऐजेंसी के रूप में आईडीए कार्यरत है। पटना में 3 पांच सितारा होटल के निर्माण हेतु प्रस्ताव आईडीए बोर्ड ‌द्वारा स्वीकृत किया गया है, जिसमे 2 पांच सितारा होटल के निर्माण हेतु विकासकर्ता का चयन किया जा चुका है।

औद्योगिक क्षेत्रों को विकसित करने के लिए किया जा रहा भूमि अधिग्रहण


उद्योग मंत्री ने कहा कि राज्य के विभिन्न जिलों में नये औ‌द्योगिक क्षेत्रों को विकसित करने हेतु स्वीकृति प्रदान की गई है। कुल 24 जिलों के 26 परियोजनाओं हेतु 13343.67 एकड़ रैयती भूमि के अधिग्रहण प्रस्ताव पर प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त कर कुल 09 जिलों में 693.14 एकड़ सरकारी भूमि के हस्तांतरण हेतु स्वीकृति प्राप्‍त हो गई है। इसके अलावा कुल 07 जिलों के 3625.46 एकड़ रैयती भूमि के प्रस्ताव को प्रशासनिक स्वीकृति हेतु उ‌द्योग विभाग में भेजा गया।

बिहारी समुदाय की सहभागिता और बिहार फाउंडेशन के विस्तार सबंधी पहल


उन्‍होंने बताया क‍ि बिहार फाउन्डेशन के चैप्टर्स देश एवं विदेशों में बिहारी समुदाय के सहयोग एवं फाउन्डेशन के उद्देश्यों के प्रति एकजुटता की वजह से अब तक कुल 47 (सैंतालीस) चैप्टर्स खुल चुके हैं, जिनमें विदेशों में 26 (छब्बीस) चैप्टर्स एवं भारत में 21 (इक्कीस) चैप्टर्स हैं। वहीं भारत में मौजूद चैप्टर्स चेन्नई, मुम्बई, नागपुर, कोलकाता, वाराणसी, हैदराबाद, सूरत, पुणे, सिलीगुड़ी, गुवाहाटी, गोवा, सिक्किम, चंडीगढ़, गुरुग्राम, भोपाल, शिलांग, दिल्ली, पंचकुला, इरनाकुलम, अगरतला तथा जोरहाट शामिल है। बिहार फाउंडेशन ‌द्वारा देश के 10 चयनित शहरों में इंटीग्रेटेड सेंटर ऑफ बिहार स्थापित किए जाने की योजना है।
बिहार दिवस 2026 -बिहार फाउंडेशन, बिहार दिवस 2026 के अवसर पर देश अवस्थित 13 स्थानीय चैप्टर्स में सांस्कृतिक-सह-कला कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है, जिसमें पैप्टर सदस्यों द्वारा सक्रिय भागीदारी और सहयोग की जा रही है।

स्टार्ट अप को बढ़ावा देने हेतु किए गए प्रमुख प्रयास


वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 109 स्टार्टअप्स को बिहार स्टार्टअप पॉलिसी के अंतर्गत पंजीकृत किया गया। (इस पहल के तहत अब तक कुल 1,653 स्टार्टअप्स का चयन किया गया है, जिनमें से 1,456 स्टार्ट अप्स को वित्तीय सहायता प्रदान की गई है. तथा अब तक कुल 92.2 करोड़ का वितरण किया जा चुका है।) वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभिन्न फंडिंग सहायता योजनाओं के तहत 692 स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता प्रदान की गई। इस अवधि में कुल ₹27.84 करोड का वितरण किया गया। स्टार्टअप बिहार के अंतर्गत 242 महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स पंजीकृत है। 47 स्टार्टअप सेल और 22 इनक्यूबेशन सेंटर शैक्षणिक संस्थानों में स्थापित किए गए है, जो नवोदित उद्‌द्यमियों को मॅटरशिप, प्रशिक्षण और संसाधनों तक पहुंच प्रदान कर रहे हैं

पटना और पूर्णिया में 3 को-वर्किंग स्पेस स्थापित किए गए है, जो आधुनिक सुविधाओं से युक्त है और लगभग 300 लोगों को किफायती कार्यालय स्थान प्रदान कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री उ‌द्यमी योजना के तहत प्रदान की जा रही वित्‍तीय सहायता


उद्योग मंत्री ने कहा कि राज्य में स्वरोजगार, उ‌द्यमिता तथा रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के उद्‌द्देश्य से लागू मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति उद्‌यमी, अति पिछड़ा वर्ग उद्‌यमी, महिला उ‌द्यमी, युवा उ‌द्यमी योजना, अल्पसंख्यक उ‌द्यमी योजना के अतर्गत अपना उ‌द्यम स्थापित करने हेतु वित्तीय एवं संस्थागत सहायता प्रदान की जा रही है। इस योजना के तहत अब तक कुल 44,179 लाभुकों को लगभग 3.242.19 करोड़ की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए मुख्यमंत्री उ‌द्यमी योजना के अंतर्गत जिला वार एवं कोटि वार निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार कुल 9.347 लाभुकों का चयन किया जाना है। इसके लिए दिनांक 25.02.2026 से 23.03.2026 की निर्धारित अवधि के दौरान उद्‌यमी पोर्टल के माध्यम से कुल 6,50,425 ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हुए हैं।
मुख्यमंत्री दिव्यांगजन उ‌द्यमी योजना राज्य के दिव्यांगजनों के आर्थिक उत्थान एवं उन्हें स्वावलंबी बनाये जाने के उद्‌देश्य से समाज कल्याण विभाग, बिहार सरकार ‌द्वारा मुख्यमंत्री दिव्यांगजन उ‌द्यमी योजना लागू की गयी है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में बैंकों द्वारा कुल 3473 लाभुकों के विरुद्ध 36058.31 लाख रू0 की स्वीकृति प्रदान किया गया तथा अब तक कुल10527.10 लाख रूपये की राशि विमुक्त की गयी है। साथ ही 4427 लाभुकों को 131.10 करोड़ रुपए सब्सिडी प्रदान की गई। पीएमएफएमई योजना में बिहार ने देश में अग्रणी स्थान प्राप्त किया है। इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में 468 करोड़ से अधिक का ऋण वितरण किया गया, जबकि कुल वितरण 1345 करोड़ से अधिक हो चुका है। यह उपलब्धि राज्य को इस क्षेत्र में शीर्ष प्रदर्शनकर्ता के रूप में स्थापित करती है।
हस्तकरघा और रेशम क्षेत्र राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण घटक हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 198.25 लाख रुपये स्वीकृति के फलस्वरुप 1143 योग्य हस्तकरधा बुनकरों को सूत क्रय हेतु रुपये 15,000/- बुनकर की दर से राशि 171.45 लाख रुपये का भुगतान किया गया है तथा अडी एवं तसर कच्चा रेशम कुल 68.02 मिट्रिक टन (अनन्तिम) का उत्पादन हुआ।
उद्योग मंत्री ने कहा कि खादी और ग्रामो‌द्योग खादी और ग्रामो‌द्योग के माध्यम से स्थानीय उत्पादन और रोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है। खादी मॉल, पटना ने वर्ष 2025-26 में 22 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की। आगामी परियोजनाओं के अंतर्गत खादी मॉल, पूर्णिया का निर्माण इस वर्ष पूर्ण होने की संभावना है, जबकि दरभंगा एवं झंझारपुर में निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसके अतिरिक्त गया, उपरा, मुंगेर एवं भागलपुर में नए खादी मॉल स्थापित करने का प्रस्ताव है।
उपेंद्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान (यूएमएसएएस) ‌द्वारा अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 तक, संस्थान ने कुल ₹6.77 करोड़ की अधिप्राप्ति दर्ज की और अबापाली दिल्ली तथा खादी मॉल जैसे विभिन्न बिक्री केंद्रों के माध्यम से ₹3.60 करोड़ की बिक्री हासिल की। मधुबनी पेंटिंग से जुड़े 200 शिल्पियोंको टूलकिट का वितरण किया गया। नई दिल्ली में आईआईटीएफ 2025, पटना में बिहार दिवस और सोनपुर मेले में प्रमुख प्रदर्शनी-सह-बिक्री कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जहां बड़ी संख्या में बुनकरों और शिल्पियों को स्टाल आवंटित किए गए हैं।
इस मौके पर उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार सहित अन्‍य अधिकारी मौजूद थे।

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