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भारत की पश्चिम एशिया के हालात पर नजर, हर हालात से निपटने को तैयार: राजनाथ सिंह

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– मौजूदा समय में भारत जहाज निर्माण के क्षेत्र में दुनिया की किसी भी बड़ी शक्ति से कम नहीं

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को पश्चिम एशिया के हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि आज हम सब एक बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रहे हैं। आज हम देख रहे हैं कि पश्चिम एशिया में बड़ा संघर्ष चल रहा है। केरल के बहुत सारे लोग इन देशों में रहते और काम करते हैं, मगर उन्हें चिंता नहीं करनी है। कुछ लोग इस मौके पर कई तरह का झूठ फैला कर घबड़ाहट फैलाना चाहते हैं, जबकि भारत इस किसी भी ऊर्जा संकट से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में ‘सैनिक सम्मान सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि हमारी सरकार हर परिस्थिति में निपटने में सक्षम और तैयार है। यह समय पूरे देश के एकजुट होने का है। संकट के समय में भाजपा ने हमेशा देश का साथ दिया है। यह समय दलगत राजनीति करने का नहीं, बल्कि सभी राजनीतिक दलों को एकसाथ आने का है। राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी रोज अपने कूटनीतिक कौशल का प्रयोग करते हुए भारतीय हितों की रक्षा कर रहे हैं, जबकि विपक्ष इस संकट के समय देश के साथ खड़े होने के बजाय तुच्छ राजनीति करने का काम कर रहा है।

उन्होंने कहा कि वैसे तो हमारा केरल भारत के सबसे सुरक्षित राज्यों में से एक है। यहां के लोगों के अंदर राष्ट्र रक्षा का भाव इतना अधिक है कि केरल के लोग सिर्फ नौसेना ही नहीं, बल्कि सेना और वायु सेना में भी बड़ी संख्या में कार्य करते हैं। आज भारत जहाज निर्माण में दुनिया की किसी भी बड़ी शक्ति से कम नहीं है। इसी केरल में मौजूद कोचीन शिपयार्ड में भारत का सबसे पहला स्वदेश विकसित एयरक्राफ्ट कैरियर बन कर तैयार हुआ। आज जिस तरह से समुद्री क्षेत्र की महत्ता बढ़ रही है, उसे ध्यान में रखते हुए हम अपनी प्राचीन ज्ञान और आधुनिक तकनीक दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ रहे हैं, क्योंकि हम 2047 तक भारत की भारतीय नौसेना को दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे ताकतवर नेवी बनाना चाहते हैं।

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रक्षा मंत्री ने कहा कि हमारी सरकार का यह मानना है कि हमारे सैनिक और पूर्व सैनिक देश के मजबूत स्तंभ हैं। हमारी सरकार ने अपने पूर्व सैनिकों के लिए बीते वर्षों में कई ठोस फैसले लिए हैं और आने वाले समय में भी यह सिलसिला रुकेगा नहीं। कांग्रेस ने इस देश के पूर्व सैनिकों की आंखों में भी धूल झोंकने का काम किया है। कांग्रेस चार दशक तक ‘वन रैंक वन पेंशन’ के नाम पर हमारे पूर्व सैनिकों से विश्वासघात करती रही। कागजों पर सिर्फ 500 करोड़ रुपये रखकर कांग्रेस कहती थी कि वो ‘वन रैंक-वन पेंशन’ लागू करेगी, लेकिन लंबे समय से चली आ रही इस मांग को हमारी सरकार ने पूरी ईमानदारी से लागू किया। इसके कारण हमारे पूर्व सैनिकों के जीवन में न केवल वित्तीय स्थिरता आई, बल्कि यह भरोसा भी मजबूत हुआ कि एनडीए सरकार ने उनके साथ न्याय किया है।

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