नई दिल्ली। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर विपक्षी दलों ने मंगलवार को लोकसभा में जोरदार हंगामा किया। कांग्रेस और अन्य विपक्षी सांसदों ने हाथों में प्लेकार्ड लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आसन के समीप पहुंच गए। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही 12 बजे दोबारा शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए फिर से स्थगित कर दी गई।
दोपहर 12 बजे कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो पीठासीन अधिकारी कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने सदन की कार्यवाही आगे बढ़ाई। इस दौरान विभिन्न मंत्रालयों से संबंधित मंत्री जिनमें वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय से जितिन प्रसाद, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय से रामदास आठवले और बी.एल. वर्मा, कृषि मंत्रालय से राम नाथ ठाकुर, ग्रामीण विकास मंत्रालय से डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी, भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्रालय से भूपति राजू निवास वर्मा और वस्त्र मंत्रालय से पबित्रा मार्गेरिटा ने प्रश्नों के जवाब सदन के पटल पर रखे।
इसके बाद विभिन्न संसदीय समितियों के लिए सदस्यों के चुनाव के लिए प्रस्ताव रखे गए। इनमें अनुमान समिति, लोक लेखा समिति, लोक उपक्रम समिति और अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण समिति के चुनाव शामिल थे। ये प्रस्ताव क्रमशः डॉ. संजय जायसवाल, जुगल किशोर, केसी वेणुगोपाल, अपराजिता सारंगी, बैजयंत पांडा, शंकर लालवानी, डॉ. फग्गन सिंह कुलस्ते और अनंता नायक ने दिए।
इसके बाद व्यवसाय सलाहकार समिति की चौदहवीं रिपोर्ट पर किरेन रिजिजू ने प्रस्ताव रखा, जिसे सदन ने स्वीकार कर लिया। साथ ही कई सदस्यों ने नियम 377 के तहत विभिन्न मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया। हालांकि विपक्षी दलों का हंगामा जारी रहा इसके बाद कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई।
इससे पहले सुबह 11 बजे बैठक शुरू हुई तो लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पूर्व सांसद सुरुपसिंह हिरिया नाइक के निधन की सूचना दी। इसके बाद सदस्यों ने मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। श्रद्धांजलि के बाद जैसे ही प्रश्नकाल शुरू हुआ, विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी। वे भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर हमला कर रहे थे। शोर-शराबे के बीच गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने एक पूरक प्रश्न का उत्तर भी दिया।
अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्षी सदस्यों से अपील की कि प्रश्नकाल में नारेबाजी का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल में सांसद प्रश्न उठाते हैं और सरकार की जवाबदेही तय होती है। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव और बजट पर चर्चा होनी है, जिसमें सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिलेगा।





