—राघोपुर में भीषण कटाव से कई मकान और झोपड़ियां नदी में समाईं, शंकरपुर-अलालपुर के लोग घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागे
भागलपुर, 10 अक्टूबर। बिहार के भागलपुर जिले के खरीक प्रखंड अंतर्गत राघोपुर में शुक्रवार देर रात गंगा नदी के भीषण कटाव से बड़ा हादसा हो गया। ब्रह्म बाबा स्थान के पास करीब 300 मीटर लंबा रेलवे बांध ध्वस्त हो गया। बांध टूटने से आसपास के गांवों में अफरा-तफरी मच गई। संभावित बाढ़ और तबाही की आशंका को देखते हुए ग्रामीण रात में ही अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे।
300 मीटर के दायरे में ढह गया बांध
जानकारी के अनुसार, हनुमान मंदिर से ब्रह्म बाबा स्थान तक गंगा के तेज कटाव के कारण बांध का बड़ा हिस्सा ढह गया। शुक्रवार देर रात अचानक मिट्टी धंसने की तेज आवाज के साथ बांध का एक विशाल हिस्सा नदी की धारा में समा गया।
कटाव की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आसपास के इलाके में दहशत फैल गई। कई पक्के मकान और झोपड़ियां भी कटाव की चपेट में आकर गंगा में समा गईं। बांध टूटने के बाद नदी का पानी रेलवे लाइन और तटबंध के निचले हिस्सों तक पहुंचने लगा, जिससे रेल परिचालन और आसपास की आबादी की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई।
शंकरपुर और अलालपुर के ग्रामीणों में दहशत
बांध ध्वस्त होने की सूचना फैलते ही शंकरपुर और अलालपुर गांवों के लोग अपने घरों से निकलकर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे। रात के अंधेरे में अचानक पैदा हुई स्थिति से ग्रामीणों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
स्थानीय लोगों को आशंका है कि कटाव जारी रहने पर आसपास के अन्य इलाकों को भी नुकसान पहुंच सकता है। नदी की तेज धारा के कारण प्रभावित क्षेत्र में खतरा बढ़ गया है।
एसपी और एसडीएम मौके पर पहुंचे
बांध टूटने की सूचना मिलते ही नवगछिया के एसपी वैभव शर्मा और एसडीएम के. परीक्षित पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने देर रात ही जोखिम वाले क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित निकालने का काम शुरू कराया।
जल संसाधन विभाग और बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल की टीमें भी मुख्य अभियंता की निगरानी में मौके पर कैंप कर रही हैं। बचे हुए तटबंध को सुरक्षित करने और कटाव पर नियंत्रण पाने के लिए युद्धस्तर पर फ्लड फाइटिंग का काम किया जा रहा है।

कटाव निरोधी कार्य की गुणवत्ता पर पहले भी उठे थे सवाल
बांध ध्वस्त होने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ गई है। ग्रामीणों के अनुसार, बांध पर चल रहे कटाव निरोधी कार्य की गुणवत्ता को लेकर 4 सितंबर को सरपंच प्रमोद मंडल ने आमरण अनशन किया था।
ग्रामीणों का दावा है कि उस दौरान पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर शैलेंद्र ने आश्वासन दिया था कि यदि बांध टूटता है, तो वह अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। अब बांध ध्वस्त होने के बाद मंत्री के कथित पुराने बयान को लेकर इलाके में चर्चा तेज हो गई है।
राहत और बचाव के साथ कटाव रोकने की चुनौती
बांध टूटने से प्रभावित क्षेत्र में फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, संभावित बाढ़ के खतरे को कम करना और शेष तटबंध को बचाना है। प्रशासन और संबंधित विभागों की टीमें मौके पर मौजूद हैं तथा कटाव रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं।
इस घटना ने गंगा के कटाव से प्रभावित गांवों की सुरक्षा और कटाव निरोधी कार्यों की प्रभावशीलता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।






