—चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में 150 उम्मीदवार मैदान में, 5.32 लाख मतदाता करेंगे मतदान; 27 अक्टूबर को आएंगे नतीजे
पटना, 22 अक्टूबर। बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए शुक्रवार, 23 अक्टूबर को मतदान होगा। चुनाव प्रचार थमने के बाद अब सभी की नजरें स्नातक और शिक्षक मतदाताओं पर टिकी हैं। चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की इन सीटों पर कुल 150 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं, जबकि 5 लाख 32 हजार मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। मतगणना 27 अक्टूबर को होगी।
पटना स्नातक सीट पर त्रिकोणीय मुकाबले की चर्चा
इस चुनाव में पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र पर राजनीतिक दलों की खास नजर है। यहां राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए), महागठबंधन और प्रशांत किशोर की जन सुराज के बीच मुकाबला दिलचस्प माना जा रहा है। एनडीए अपनी एकजुटता के दम पर जीत का दावा कर रहा है, जबकि जन सुराज मतदाताओं के सामने नए विकल्प के रूप में खुद को पेश कर रही है।
यह चुनाव उम्मीदवारों के साथ-साथ राजनीतिक दलों की रणनीति और स्नातक मतदाताओं के भरोसे की भी परीक्षा माना जा रहा है।
राजद के लिए अहम चुनाव, कई सीटों पर कांग्रेस से सीधा मुकाबला
आठ सीटों में से सात पर चुनाव लड़ रही राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के लिए यह चुनाव कई मायनों में महत्वपूर्ण है। पार्टी का कोई भी उम्मीदवार मौजूदा सीटिंग एमएलसी नहीं है। वहीं, पांच सीटों पर कांग्रेस और राजद के उम्मीदवार आमने-सामने हैं। चुनाव प्रचार के दौरान तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी भी चर्चा में रही। राजद उम्मीदवारों ने अपने स्तर पर प्रचार किया।
राजद प्रवक्ता एजाज अहमद ने एनडीए के भीतर खींचतान का आरोप लगाते हुए कहा कि शिक्षक और स्नातक मतदाताओं का भरोसा तेजस्वी यादव पर है। उन्होंने दावा किया कि 27 अक्टूबर को नतीजे आने पर महागठबंधन की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
उन्होंने कहा, “एनडीए और जदयू में घमासान है। तू-तू मैं-मैं की स्थिति है। एक विधायक बागी है, तो वहीं केंद्रीय मंत्री भी चुनाव प्रचार नहीं कर रहे हैं। एनडीए में सब कुछ ठीक नहीं है। बिहार के शिक्षक और स्नातकों का विश्वास तेजस्वी यादव पर है।”
कांग्रेस ने भी जीत का किया दावा
कांग्रेस अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रही है। पार्टी प्रवक्ता आसित नाथ तिवारी के मुताबिक, प्रदेश अध्यक्ष और बिहार प्रभारी ने कांग्रेस उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार किया है। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल के पास मंत्रियों और संसाधनों की उपलब्धता के बावजूद इस बार कांग्रेस की स्थिति पहले से बेहतर है।
हालांकि, कई सीटों पर राजद और कांग्रेस के उम्मीदवारों के आमने-सामने होने से महागठबंधन की चुनावी एकजुटता पर सवाल उठ रहे हैं। इसका मतदाताओं के रुझान पर कितना असर पड़ेगा, यह मतदान और मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगा।
एनडीए ने प्रचार में उतारे बड़े नेता
एनडीए ने विधान परिषद चुनाव के प्रचार में कई बड़े नेताओं को मैदान में उतारा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के स्तर पर बैठकें हुईं। उपमुख्यमंत्री, सरकार के मंत्री, सांसद और विधायक भी उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार करते नजर आए।
जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और निशांत कुमार ने भी एनडीए उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार किया।
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने दावा किया कि प्रचार के दौरान मिले माहौल के आधार पर एनडीए सभी आठ सीटों पर जीत दर्ज करेगा। उन्होंने कहा, “हम लोगों ने चुनाव प्रचार में घूमने का जिस प्रकार से काम किया है, जो माहौल लग रहा है, एनडीए के सभी आठ उम्मीदवार जीतेंगे, यह तय है।”
जन सुराज नए विकल्प के रूप में पेश कर रही चुनौती
प्रशांत किशोर की जन सुराज भी इस चुनाव के जरिए अपनी राजनीतिक ताकत परख रही है। पार्टी की ओर से लगातार दावा किया गया कि बिहार के मतदाता बदलाव चाहते हैं। प्रशांत किशोर ने मतदाताओं से जन सुराज के उम्मीदवारों को नए विकल्प के रूप में देखने की अपील की।
उन्होंने कहा कि इस चुनाव से राज्य सरकार नहीं बदलेगी, लेकिन जन सुराज के उम्मीदवारों की जीत से सरकार पर बेहतर काम करने का दबाव बनेगा।
प्रशांत किशोर के मुताबिक, “इस चुनाव से सरकार बदलने नहीं जा रही है। एनडीए की सरकार रहेगी और नेता प्रतिपक्ष ही रहेगा, लेकिन जन सुराज के उम्मीदवार जीतते हैं तो लोगों को एक नया विकल्प मिलेगा। डर पैदा होगा कि काम नहीं करेंगे तो जनता दोबारा मौका नहीं देगी।”
मतदान से पहले एनडीए सभी आठ सीटों पर जीत का दावा कर रहा है। राजद और कांग्रेस भी अपनी-अपनी जीत को लेकर आश्वस्त हैं। दूसरी ओर, कई सीटों पर महागठबंधन के घटक दलों के बीच सीधा मुकाबला है, जबकि जन सुराज नए विकल्प के रूप में मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
अब मतदाताओं का फैसला ही तय करेगा कि विभिन्न दलों की चुनावी रणनीतियों को कितना समर्थन मिलता है।






