मुख्य सचिव की अध्यक्षता में ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ की उच्च स्तरीय बैठक
पटना: बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों को आधुनिक स्वरूप में संरक्षित करने के लिए राज्य सरकार ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। इसी क्रम में बुधवार को बिहार संग्रहालय में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के अंतर्गत गठित उच्च स्तरीय समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक का मुख्य केंद्र राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध प्राचीन पाण्डुलिपियों को सूचीबद्ध करना, उनका दस्तावेजीकरण करना और उन्हें डिजिटल रूप में सुरक्षित करना रहा।

मुख्य सचिव ने इस दौरान निर्देश दिया कि पाण्डुलिपियों का यह संरक्षण कार्य हमारी सांस्कृतिक पहचान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसे ‘मिशन मोड’ में संचालित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि संपूर्ण बिहार में राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण का कार्य अगले 30 दिनों के भीतर हर हाल में पूरा कर लिया जाए।
बैठक में जिला-वार प्रगति की समीक्षा की गई । सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे स्थानीय क्लस्टर सेंटर और स्वतंत्र केंद्रों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर इस कार्य को गति प्रदान करें।
‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत प्राचीन पाण्डुलिपियों के संरक्षण को गति
अभियान की निरंतर निगरानी और प्रभावी रणनीति तैयार करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया कि 09 अप्रैल को शाम 4:00 बजे सभी संबंधित अधिकारियों और संस्थानों के साथ एक विशेष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की जाएगी।
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि “ज्ञान भारतम् मिशन” राज्य की सांस्कृतिक एवं बौद्धिक धरोहर के संरक्षण के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। अतः सभी संबंधित विभागों एवं संस्थानों को समन्वित प्रयास करते हुए निर्धारित समय-सीमा के भीतर लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
इस बैठक में बिहार संग्रहालय के महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह, कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव प्रणव कुमार, कला एवं संस्कृति विभाग के संग्रहालय निदेशक कृष्ण कुमार, खुदाबख्श लाइब्रेरी के पूर्व निदेशक डॉ. इम्तियाज अहमद, नव नालंदा महाविहार के कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह, प्रो. विश्वजीत कुमार, संकायाध्यक्ष, पाली एवं अन्य भाषा विभाग, नव नालंदा महाविहार सहित कई अन्य विशेषज्ञ और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।






